
भोपाल का भारत भवन बुधवार से जल संरक्षण और भारतीय संस्कृति के सबसे बड़े वैचारिक आयोजनों में शामिल होने जा रहा है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत शुरू हो रहे ‘सदानीरा समागम’ का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। यह आयोजन सिर्फ एक संगोष्ठी नहीं, बल्कि जल, पर्यावरण और भारतीय ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय स्तर का बड़ा मंथन माना जा रहा है। खास बात यह है कि इसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ एक मंच पर नजर आएंगे।
जल संरक्षण पर होगा राष्ट्रीय विमर्श
वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित यह 7 दिवसीय कार्यक्रम 2 जून तक चलेगा। आयोजन का मुख्य फोकस जल संरक्षण, पंचमहाभूत, सतत विकास और भारतीय सांस्कृतिक दृष्टि पर रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम में पर्यावरण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और कलाकार अलग-अलग सत्रों में भाग लेंगे। इससे जल संकट और पारंपरिक ज्ञान को जोड़कर नए समाधान तलाशने की कोशिश होगी।
पंचमहाभूतों पर गहराई से होगी चर्चा
वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि समागम में भारतीय दर्शन के पांच तत्व— जल, पृथ्वी, वायु, आकाश और अग्नि— पर आधारित विशेष वैचारिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में भूगर्भीय जल स्रोत, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली पर विस्तार से चर्चा होगी। आयोजन का उद्देश्य आधुनिक विज्ञान और भारतीय परंपरा के बीच संवाद स्थापित करना है।
इसरो, BHU और IIM बोधगया के विशेषज्ञ होंगे शामिल
इस राष्ट्रीय मंथन में देश की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं की भागीदारी भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जानकारी के मुताबिक ISRO, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) और IIM बोधगया के प्रतिनिधि कार्यक्रम में अपने विचार साझा करेंगे। इसके अलावा विभिन्न कॉर्पोरेट समूहों के CSR प्रमुख भी शामिल होंगे। इससे जल संरक्षण के क्षेत्र में सरकारी और निजी साझेदारी को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शाम को दिखेगा संस्कृति और कला का रंग
‘सदानीरा समागम’ सिर्फ वैचारिक मंच तक सीमित नहीं रहेगा। हर शाम सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रस्तुतियों का आयोजन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में नृत्य-नाटिकाएं, लोकगायन और रंगमंचीय प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र होंगी। वहीं भारतीय नौसेना बैंड की सिम्फनी, ‘गोवर्धन लीला’ और ‘गंगा यात्रा’ जैसी प्रस्तुतियां दर्शकों को खास अनुभव देंगी।
‘जल, जंगल, जीवन’ थीम पर विशेष कार्यशाला
समागम के दौरान ‘जल, जंगल, जीवन’ विषय पर राष्ट्रीय जनजातीय चित्रांकन कार्यशाला भी आयोजित होगी। इसमें देशभर के प्रसिद्ध कलाकार भाग लेंगे। इसके साथ पारंपरिक चित्र शैलियों में जल विषयक कार्यशाला भी रखी गई है। आयोजकों का मानना है कि कला के जरिए जल संरक्षण का संदेश ज्यादा प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
चार बड़ी प्रदर्शनियां भी रहेंगी आकर्षण
आयोजन स्थल पर जल और पर्यावरण से जुड़ी 4 विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। इनमें जलचर जीवन, मध्यप्रदेश का ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’, लघु चित्रों में जल और भूगर्भीय जल स्रोतों से जुड़ी प्रदर्शनी शामिल हैं। इन प्रदर्शनियों के आयोजन में मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, बरकतुल्ला विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय सहयोग करेंगे। इससे आम लोगों को जल संकट की गंभीरता को समझने का अवसर मिलेगा।
जल और संस्कृति पर पुस्तकों का होगा लोकार्पण
कार्यक्रम में जल और भारतीय संस्कृति पर आधारित कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा। इनमें ‘अंतर्जली यात्रा’, ‘पुरोवाक्’, प्रेमशंकर शुक्ल की ‘आत्मा की घाटी में पानी का संगीत’ और राजेश्वर त्रिवेदी की ‘जल, संस्कृति और स्थापत्य’ शामिल हैं। आयोजकों के मुताबिक ये पुस्तकें जल और सभ्यता के संबंध को नए नजरिए से समझाने का प्रयास करती हैं।
कई संस्थाओं का मिल रहा सहयोग
इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए भारत भवन, मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय, जनसंपर्क विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय समेत कई संस्थाएं सहयोग कर रही हैं। इसके अलावा केंद्रीय भूजल बोर्ड, नर्मदा समग्र, सेज, एलएनसीटी और सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों की भागीदारी भी इसे राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण आयोजन बना रही है।
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