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कभी मध्य प्रदेश के जंगलों की पहचान थे जंगली भैंस, अब कान्हा में फिर बसाने की तैयारी

12 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
कभी मध्य प्रदेश के जंगलों की पहचान थे जंगली भैंस, अब कान्हा में फिर बसाने की तैयारी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में जंगली भैंसों की आबादी फिर से स्थापित करने की दिशा में कान्हा टाइगर रिजर्व में अहम कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट जिले की सूपखार रेंज में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए 8 जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा।


यह पहल प्रदेश में करीब 100 साल बाद जंगली भैंसों की पुनर्बसाहट के प्रयास का हिस्सा है। इसके जरिए वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता बढ़ाने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।


कान्हा में दूसरे चरण की शुरुआत, 6 मादा और 2 नर भैंसे शामिल

इस परियोजना के तहत असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से करीब 2,200 किलोमीटर दूर स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क से जंगली भैंसों को मध्य प्रदेश लाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस सहयोग के लिए असम सरकार का आभार जताया।


कान्हा पहुंचाए गए आठ भैंसों में 6 मादा और 2 नर हैं। इन्हें 28 अप्रैल और 9 मई 2025 को दो चरणों में लाया गया था। वर्षाकाल के बाद अब इन्हें बड़े बाड़े में स्थानांतरित कर स्थानीय जलवायु और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।


चीतों के संरक्षण के बाद जंगली भैंसों पर जोर

मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रदेश में चल रही दूसरी पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर स्थापित नए टाइगर रिजर्व में चीतों के तीसरे ठिकाने की शुरुआत की गई।


प्रदेश में बाघ, चीता, तेंदुआ, घड़ियाल और मगरमच्छ समेत विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने हाथियों की स्थायी मौजूदगी को भी प्रदेश की वन्यजीव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।


प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाले सेवा पखवाड़े का भी जिक्र

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे सेवा पखवाड़े के दौरान वन्यजीव संरक्षण की गतिविधियों को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कान्हा टाइगर रिजर्व की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और वहां मौजूद वन्यजीवों की विविधता का भी उल्लेख किया।


मुख्यमंत्री के मुताबिक, जंगली भैंसों को दोबारा बसाने का प्रयास उन प्रजातियों को उनके पुराने प्राकृतिक क्षेत्रों में स्थापित करने की व्यापक पहल का हिस्सा है, जो कभी मध्य प्रदेश की पहचान हुआ करती थीं।


वन्यजीव संरक्षण के साथ ग्रामीण विकास भी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों, संरक्षण कार्यकर्ताओं और प्रदेशवासियों को इस पहल के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की जरूरतों और चिंताओं का ध्यान रखना भी आवश्यक है।


सरकार की प्राथमिकता वन संरक्षण, स्थानीय जनजीवन के विकास और वन्यजीवों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना है। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के साथ प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया।


पांच महीने में बालाघाट का चौथा दौरा

डॉ. मोहन यादव ने बताया कि पिछले करीब 5 महीनों में बालाघाट क्षेत्र का यह उनका चौथा दौरा है। उन्होंने इसे क्षेत्र में विकास कार्यों, जनजीवन को बेहतर बनाने और वन्यजीव संरक्षण के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता से जोड़ा।


मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जनभागीदारी, वन विभाग की सक्रियता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा।

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