
भोपाल। खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध मंदिर अब अतिक्रमण से मुक्त होने की दिशा में हैं। केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए अवैध निर्माण पर कार्रवाई शुरू कर दी है। यह कदम न सिर्फ धरोहर संरक्षण बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी बड़ा बदलाव ला सकता है।
खजुराहो में अतिक्रमण पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर समूह के आसपास बढ़ते अतिक्रमण पर अब केंद्र सरकार ने सीधे हस्तक्षेप किया है। सांसद विष्णुदत्त शर्मा की पहल के बाद मामला तेज़ी से आगे बढ़ा है। बताया गया है कि इलाके में कई अनधिकृत निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जिन पर अब कार्रवाई तय मानी जा रही है। यही नहीं, आगे क्या कदम होंगे—यह जानना और भी अहम हो जाता है।
लोकसभा में उठे मुद्दे के बाद शुरू हुआ एक्शन
1 दिसंबर 2025 को सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने लोकसभा में नियम 377 के तहत यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने खजुराहो क्षेत्र में तेजी से बढ़ते अतिक्रमण और अनियंत्रित निर्माण पर चिंता जताई थी। इस मुद्दे के उठते ही केंद्र सरकार हरकत में आई और संबंधित विभागों को तुरंत जांच और रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए। लेकिन जांच में क्या सामने आया, यह और भी चौंकाने वाला है।
ASI सर्वे में खुलासा—निषिद्ध क्षेत्र में भी निर्माण
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की जांच में सामने आया कि खजुराहो मंदिरों के निषिद्ध और विनियमित क्षेत्र में भी कई अवैध निर्माण खड़े हो चुके हैं। यह स्थिति धरोहर की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही है। इसी वजह से अब प्रशासन ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं—जो आगे और सख्त हो सकते हैं।
नोटिस जारी, प्रशासन और पुलिस भी एक्शन में
केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के निर्देश पर अब संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। स्थानीय प्रशासन को साफ निर्देश दिए गए हैं कि अवैध निर्माण तुरंत रोके जाएं और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटाया भी जाए। इसके साथ ही पुलिस में शिकायत दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। आगे की कार्रवाई कितनी सख्त होगी, इस पर सबकी नजर है।
धरोहर बचाने के लिए निगरानी होगी और कड़ी
खजुराहो, जो कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है, उसकी सुरक्षा को लेकर अब निगरानी और सख्त की जाएगी। ASI ने साफ किया है कि भविष्य में अतिक्रमण दोबारा न हो, इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग, समन्वय और प्रवर्तन कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार का लक्ष्य साफ है—खजुराहो की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को किसी भी कीमत पर नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
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