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खनियाधाना में अवैध शराब के खिलाफ आदिवासी महिलाओं का आंदोलन तेज, चमरौआ में दुकान से शराब निकालकर सड़क पर फेंकी

29 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
खनियाधाना में अवैध शराब के खिलाफ आदिवासी महिलाओं का आंदोलन तेज, चमरौआ में दुकान से शराब निकालकर सड़क पर फेंकी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

रिपोर्ट: अतुल जैन 

खनियाधाना क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ आदिवासी महिलाओं का जनआंदोलन लगातार मजबूत होता जा रहा है। मंगलवार को चमरौआ गांव में बड़ी संख्या में महिलाओं ने एक दुकान पर पहुंचकर कथित रूप से रखी गई शराब की बोतलों को बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दिया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।


इस कार्रवाई को क्षेत्र में चल रहे नशामुक्ति अभियान की लगातार तीसरी बड़ी पहल माना जा रहा है। इससे पहले कफ़ार और दविया कला गांव में भी महिलाओं ने अवैध शराब के खिलाफ इसी तरह विरोध दर्ज कराया था।


दुकान पर पहुंचकर किया विरोध

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गांव में लंबे समय से अवैध शराब बिकने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसी के विरोध में महिलाएं एकजुट होकर संबंधित दुकान तक पहुंचीं और वहां मौजूद शराब की बोतलों को सड़क पर फेंक दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।


महिलाओं ने बताई आंदोलन की वजह

महिलाओं का कहना है कि अवैध शराब के कारण गांव के कई परिवार गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं।


उनके मुताबिक—

  • नशे के कारण घरेलू विवाद बढ़ रहे हैं।

  • मारपीट की घटनाएं सामने आ रही हैं।

  • परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा शराब में खर्च हो रहा है।

  • बच्चों की पढ़ाई और परिवार के पालन-पोषण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।


प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप

महिलाओं ने आरोप लगाया कि अवैध शराब की बिक्री की शिकायत कई बार प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों से की गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने स्वयं आगे आकर गांवों को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से अभियान शुरू करने का फैसला लिया।


12 जुलाई को लिया गया था सामूहिक संकल्प

12 जुलाई को आदिवासी सहरिया समाज की बैठक में समाज को नशामुक्त बनाने का निर्णय लिया गया था।


बैठक में तय किया गया कि—

  1. समाज का कोई भी व्यक्ति शराब का सेवन नहीं करेगा।

  2. शराब पीते पाए जाने पर ₹5,100 का आर्थिक दंड लगाया जाएगा।

  3. कच्ची शराब बनाने और बेचने वालों का सामाजिक विरोध किया जाएगा।

  4. प्रशासन से ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।


16 जुलाई से शुरू हुआ अभियान

अवैध शराब के खिलाफ इस जनअभियान की शुरुआत 16 जुलाई को खनियाधाना थाना क्षेत्र के कफ़ार गांव से हुई थी, जहां महिलाओं ने कथित अवैध शराब के ठिकानों पर पहुंचकर शराब और महुआ नष्ट किया था। इसके बाद पिछोर क्षेत्र के दविया कला गांव में भी महिलाओं ने सड़क पर शराब फेंककर विरोध जताया। अब चमरौआ गांव की कार्रवाई इस अभियान की तीसरी बड़ी कड़ी बन गई है।


आंदोलन जारी रखने का ऐलान

महिलाओं ने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य गांवों को नशामुक्त बनाना और आने वाली पीढ़ी को नशे की बुराइयों से बचाना है। उनका कहना है कि जब तक क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं होगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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