
भोपाल। गुना-शिवपुरी की राजनीति अब सिर्फ मंचों तक सीमित नहीं रही। बीजेपी के अंदर चल रही खींचतान अब खुलकर सोशल मीडिया पर दिखाई देने लगी है। पूर्व सांसद केपी यादव को मध्य प्रदेश राज्य खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी के दो बड़े गुट आमने-सामने आ गए हैं। स्थिति इतनी बढ़ गई कि बीजेपी संगठन को दोनों खेमों के नेताओं को नोटिस जारी करना पड़ा।
BJP ने क्यों दिखाई सख्ती?
केपी यादव को नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके समर्थकों में उत्साह साफ नजर आया। इसी दौरान बीजेपी मंडल उपाध्यक्ष कृष्णपाल यादव की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि “कोई माने या न माने, दो साल तो मंत्री हैं… आगे भी दबदबा बना रहेगा, जैसा 2019 में लिखा था।” संगठन ने इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना।
भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिकरवार के निर्देश पर जिला महामंत्री संतोष धाकड़ ने केपी यादव समर्थक कृष्णपाल यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया। उन्हें 3 दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। अब निगाह इस बात पर है कि उनका जवाब संगठन को संतुष्ट कर पाएगा या नहीं।
मंचों से लेकर सोशल मीडिया तक बढ़ी तल्खी
बीते कुछ दिनों में गुना और अशोकनगर के राजनीतिक कार्यक्रमों में भी दोनों गुटों के बीच दूरी साफ दिखाई दी। केपी यादव ने बिना नाम लिए विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुछ लोग “फूट डालो और राज करो” की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के लोग उन्हें आशीर्वाद देने पहुंचे, लेकिन कुछ चेहरे मंच पर नजर नहीं आए। राजनीतिक गलियारों में इस बयान को सीधे सिंधिया समर्थकों पर हमला माना गया। यही वजह है कि अब यह विवाद केवल व्यक्तिगत बयानबाजी नहीं, बल्कि बीजेपी के भीतर बढ़ती गुटबाजी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सिंधिया की चुप्पी ने बढ़ाई चर्चाएं
पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन उनके समर्थकों और केपी यादव खेमे के बीच जारी डिजिटल जंग लगातार सुर्खियां बटोर रही है।
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