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काइफोप्लास्टी प्रक्रिया से एम्स भोपाल में कैंसर रोगी को मिली तत्काल राहत

01 दिस, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
एम्स भोपाल

एम्स भोपाल

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डेस्क रिपोर्टर

भोपाल। एम्स भोपाल कैंसर-जनित रीढ़ संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे मरीजों की जीवन-गुणवत्ता सुधारने हेतु उन्नत दर्द-प्रबंधन सेवाओं को निरंतर मजबूत कर रहा है। इसी दिशा में एम्स भोपाल के एनेस्थीसिया विभाग द्वारा कैंसर रोगी के D5 स्तर पर मेटास्टेटिक वर्टेब्रल कोलैप्स से उत्पन्न असहनीय दर्द के उपचार हेतु एक जटिल काइफोप्लास्टी प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की गई।

रोगी कई दिनों से अत्यधिक मात्रा में मॉर्फ़ीन देने पर भी राहत न मिलने वाले तीव्र दर्द से पीड़ित था। प्रक्रिया स्थानीय एनेस्थीसिया के अंतर्गत की गई और इसके तुरंत बाद मरीज को पूर्ण दर्द-मुक्ति प्राप्त हुई। मरीज मात्र एक घंटे के भीतर छुट्टी के योग्य हो गया। काइफोप्लास्टी एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है जिसमें फ्रैक्चर हुए वर्टेब्रल बॉडी में एक छोटी सुई के माध्यम से प्रवेश किया जाता है। इसके अंदर एक विशेष गुब्बारा फैलाया जाता है, जिससे धंसी हुई हड्डी की ऊँचाई पुनः बहाल होती है। इसके बाद उस स्थान में हड्डी जैसी विशेष सीमेंट सामग्री भरी जाती है, जिससे हड्डी तुरंत मजबूत हो जाती है और दर्द तेजी से कम होता है।
वर्टेब्रल कम्प्रेशन फ्रैक्चर रीढ़ की किसी हड्डी के दब जाने या टूटकर बैठ जाने को कहा जाता है। यह कैंसर के फैलाव, ऑस्टियोपोरोसिस या चोट के कारण हो सकता है। ऐसे फ्रैक्चर में तीव्र दर्द होता है और मरीज की दैनिक गतिविधियाँ प्रभावित हो सकती हैं। काइफोप्लास्टी ऑस्टियोपोरोसिस से ग्रस्त वृद्ध मरीजों में होने वाले वर्टेब्रल कम्प्रेशन फ्रैक्चर के उपचार में भी अत्यंत लाभकारी है।
ऑस्टियोपोरोसिस के कारण रीढ़ की हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं, जिससे हल्के दबाव में भी वर्टेब्रा धंस सकता है। यह अचानक होने वाले तीव्र पीठ दर्द, गतिशीलता में कमी और लंबे समय तक चलने वाली अक्षमता का कारण बन सकता है। काइफोप्लास्टी तत्काल स्थिरता प्रदान करती है, रीढ़ की संरेखण में सुधार करती है और तुरंत दर्द-राहत देती है, जिससे मरीज जल्दी अपने दैनिक कार्यों में लौट पाते हैं और जीवन-गुणवत्ता में सुधार होता है।
यह सफलता दर्शाती है कि काइफोप्लास्टी ऐसे मरीजों के लिए जीवन-परिवर्तनकारी प्रक्रिया साबित हो सकती है जिनका दर्द दवाइयों से भी नियंत्रित नहीं होता। यह प्रक्रिया डॉ. अनुज जैन (अतिरिक्त प्रोफेसर एवं इंचार्ज, पेन मेडिसिन यूनिट, एनेस्थीसिया विभाग, एम्स भोपाल) के नेतृत्व में की गई। टीम में डॉ. निरव, डॉ. गोपी और डॉ. निखिल शामिल रहे, जिन्होंने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एनेस्थीसिया विभाग ने इस उपलब्धि के लिए एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर तथा विभागाध्यक्ष डॉ. वैशाली वैंदेसकर के प्रति उनके मार्गदर्शन और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया है। एम्स भोपाल कैंसर-जनित रीढ़ संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे मरीजों को अत्याधुनिक दर्द-प्रबंधन सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।


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