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लाडली बहनों का इंतजार बढ़ा, 1500 रुपए की 35वीं किस्त कब आएगी? तारीख को लेकर बड़ा अपडेट

09 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
लाडली बहनों का इंतजार बढ़ा, 1500 रुपए की 35वीं किस्त कब आएगी? तारीख को लेकर बड़ा अपडेट
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश की लाखों महिलाओं की नजर अब एक ही सवाल पर टिकी है—1500 रुपए कब आएंगे? अप्रैल की किस्त को लेकर इंतजार बढ़ता जा रहा है, लेकिन तारीख अभी साफ नहीं है।


35वीं किस्त को लेकर सस्पेंस, कब आएंगे पैसे?

लाडली बहना योजना की 35वीं किस्त इस महीने जारी होनी है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है। हालांकि पिछले ट्रेंड को देखें तो यह किस्त 10 से 15 अप्रैल के बीच कभी भी ट्रांसफर की जा सकती है—अब सबकी नजर इसी विंडो पर है।


हर महीने बदलती तारीख, इस बार क्या होगा?

शुरुआत में योजना की राशि 5-7 तारीख के बीच आती थी, फिर इसे बढ़ाकर 5-10 किया गया। अब नई व्यवस्था के तहत भुगतान 10 से 15 तारीख के बीच हो रहा है। यही वजह है कि इस बार भी इसी समय के आसपास पैसे आने की उम्मीद जताई जा रही है—लेकिन कन्फर्म डेट अभी बाकी है।


करोड़ों बहनों को मिल चुका है बड़ा फायदा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अब तक इस योजना के तहत 54000 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि महिलाओं के खातों में ट्रांसफर कर चुके हैं। इस बार भी करीब 1.25 लाख महिलाओं के खातों में 1500 रुपए भेजे जाएंगे, लेकिन इसके लिए एक जरूरी शर्त है—जो आगे पढ़ना जरूरी है।


E-KYC नहीं तो अटक सकती है किस्त

सरकार ने साफ कर दिया है कि योजना का लाभ लेने के लिए E-KYC अनिवार्य है। अगर आपने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, तो अप्रैल की 1500 रुपए की किस्त आपके खाते में नहीं आएगी—यानी इंतजार बेकार हो सकता है।


घर बैठे ऐसे करें E-KYC

E-KYC के लिए आपको समग्र पोर्टल पर जाना होगा और आसान स्टेप्स फॉलो करने होंगे:

- समग्र ID डालें

- कैप्चा भरें

- OTP से वेरिफिकेशन करें

- आधार से KYC पूरा करें


यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही अगली किस्त का लाभ सुनिश्चित होगा—इसलिए देर न करें।


बहनों की उम्मीदें, छोटी राशि लेकिन बड़ा सहारा

भोपाल की एक लाभार्थी जमुना देवी बताती हैं कि जैसे ही महीने की शुरुआत होती है, उन्हें इस पैसे का इंतजार रहता है। वहीं 56 वर्षीय हेमलता कहती हैं कि इस राशि से उनकी दवाइयों का खर्च निकल जाता है और घर में छोटे-छोटे खर्च पूरे हो जाते हैं—यानी यह मदद भले छोटी हो, लेकिन असर बड़ा है।

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