
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में देर रात एक ऐसा प्रशासनिक फैसला सामने आया, जिसने सत्ता और सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी। सरकार ने मंत्री लखन पटेल से पशुपालन विभाग का प्रभार वापस ले लिया है, जबकि इसकी कोई आधिकारिक वजह अब तक सामने नहीं आई है।
देर रात जारी गजट अधिसूचना के बाद अब लखन पटेल के पास केवल आनंद विभाग रहेगा। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पशुपालन विभाग का प्रभार अपने पास रख लिया है। फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसके मायनों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। अब मुख्यमंत्री मोहन यादव के पासवर्ड कुल 11 विभागों की जिम्मेदारियां है।
मंत्री लखन पटेल ने क्या कहा?
विभाग हटाए जाने पर लखन पटेल ने कहा कि विभाग देना और वापस लेना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि उनसे पशुपालन विभाग क्यों वापस लिया गया। साथ ही उन्होंने पुष्टि की कि अब यह विभाग मुख्यमंत्री के पास है।
क्या आगे भी होंगे बदलाव?
सरकार ने फैसले के पीछे कोई कारण सार्वजनिक नहीं किया है। ऐसे में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल या विभागों के प्रभार में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
बैंक अधिकारी से मंत्री बनने तक का सफर
दमोह जिले की पथरिया विधानसभा से विधायक लखन पटेल का राजनीतिक सफर सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद शुरू हुआ। 1978-79 में जबलपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में कई वर्षों तक सेवाएं दीं।बाद में बैंक की नौकरी छोड़कर राजनीति में सक्रिय हुए। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष भी रहे।
चुनावी रिकॉर्ड
2013 में भाजपा ने पहली बार पथरिया से उम्मीदवार बनाया और वे विधायक चुने गए।
2018 के चुनाव में बसपा की रामबाई से हार का सामना करना पड़ा।
2023 में दोबारा जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार में उन्हें स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री बनाया गया।
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