
उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन में किसानों के विरोध के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने सोमवार को लैंड पूलिंग एक्ट को पूरी तरह निरस्त करने का बड़ा फैसला ले लिया है। अब सिंहस्थ 2028 के विकास कार्य तो जारी रहेंगे, लेकिन किसानों की जमीन अधिग्रहित नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा, “साधु-संतों और किसानों की भावना का सम्मान करते हुए सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 भव्य और दिव्य बनाया जाएगा।”
किसानों का विरोध हुआ असरदार, एक्ट अब पूरी तरह खत्म
उज्जैन में लैंड पूलिंग एक्ट के तहत किसानों की जमीन ली जा रही थी, जिसे किसानों और किसान संगठनों ने कड़ा विरोध किया। सोमवार को भोपाल स्थित सीएम हाउस में अहम बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव, भारतीय किसान संघ प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और कई प्रतिनिधि शामिल थे। इसी बैठक में सरकार ने लैंड पूलिंग एक्ट तुरंत प्रभाव से खत्म करने का फैसला लिया।
सिंहस्थ की तैयारियां जारी रहेंगी, पर बिना जमीन अधिग्रहण के
➡️ मेला क्षेत्र में सीवरेज, नालियां, बिजली, प्रकाश व्यवस्था और अन्य बुनियादी काम जारी रहेंगे।
➡️ 50 किलोमीटर सड़क निर्माण योजना पहले की तरह जारी रहेगी।
➡️ चित्रकूट, हरिद्वार की तर्ज पर स्पिरिचुअल सिटी बनाने की योजना फिलहाल रोक दी गई है।
अब स्थायी निर्माण नहीं होंगे
लैंड पूलिंग एक्ट के तहत किसानों की जमीन लेने के बाद 50% जमीन सरकार अपने पास रख लेती थी और बाकी आधी जमीन किसानों को वापस दी जाती थी। इसी जमीन पर सरकार स्थायी सड़क, सीवरेज, लाइट्स और स्पिरिचुअल सिटी बनाने जा रही थी। किसानों का कहना था कि इससे उनकी खेती और आजीविका पर असर पड़ेगा। इसलिए सरकार ने स्पष्ट किया, “किसी की खेती को नुकसान नहीं पहुंचेगा, सिंहस्थ की व्यवस्था अस्थायी ढांचे पर आधारित होगी।”
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा, “साल 2028 में होने वाला सिंहस्थ कुंभ मेला भव्य और दिव्य होगा। साधु-संतों और किसानों की भावना का सम्मान करते हुए काम जारी रहेगा।”
क्या बदलेगा और क्या रहेगा जारी?
लैंड पूलिंग एक्ट : पूरी तरह निरस्त
किसानों की जमीन अधिग्रहण : नहीं होगा
स्थायी निर्माण (स्पिरिचुअल सिटी आदि) : फिलहाल रोक
सीवरेज, नाली, लाइट, सड़क : जारी रहेंगे
सिंहस्थ 2028 की तैयारी : तेज़
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