
इंदौर। महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन का महाकाल मंदिर सिर्फ श्रद्धा का केंद्र ही नहीं रहा, बल्कि अब यह देश के सबसे ज्यादा दान पाने वाले मंदिरों में शामिल होता जा रहा है। इस साल भक्तों ने बाबा महाकाल पर दिल खोलकर दान लुटाया है। हालत ये है कि मंदिर की दान पेटियां नोटों से भर गईं और सोना-चांदी के आभूषणों का अंबार लग गया। 1 जनवरी से 15 दिसंबर तक बाबा महाकाल के दरबार में कुल 107 करोड़ 93 लाख रुपये की आमदनी दर्ज की गई है, वहीं करीब 13 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का स्वर्ण-रजत भी मंदिर खजाने में समर्पित हुआ है।
दान पेटियों और शीघ्र दर्शन से 107 करोड़ 93 लाख की कमाई
महाकाल मंदिर समिति के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल की शुरुआत से 15 दिसंबर तक भक्तों ने मंदिर की दान पेटियों में करीब 43 करोड़ 43 लाख रुपये अर्पित किए। इसके अलावा शीघ्र दर्शन व्यवस्था से 64 करोड़ 50 लाख रुपये की आय हुई। यानी सिर्फ इन दो मदों से ही कुल आमदनी 107 करोड़ 93 लाख रुपये तक पहुंच गई है। यह पिछले वर्षों की तुलना में अब तक की सबसे बड़ी कमाई मानी जा रही है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि ये आंकड़े केवल दान पेटी और शीघ्र दर्शन के हैं। इसमें भस्म आरती, धर्मशाला, अन्य विशेष सेवाओं और प्रसाद व्यवस्था से होने वाली आय शामिल नहीं है। साल के अंत तक यह आंकड़ा और भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
महाकाल लोक बनने के बाद बदली उज्जैन की तस्वीर
महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। पहले जहां रोजाना 40 से 50 हजार भक्त दर्शन के लिए पहुंचते थे, अब यह संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख तक हो गई है।
मंदिर समिति के अनुसार, 1 जनवरी से 15 दिसंबर तक करीब 5 करोड़ 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। उज्जैन रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख मार्गों पर हर दिन भारी भीड़ देखने को मिल रही है। होटल, धर्मशालाएं और स्थानीय बाजार भी पूरी तरह गुलजार हैं।
सोना-चांदी के दान में भी बना नया रिकॉर्ड
सिर्फ नकद दान ही नहीं, बल्कि इस साल भक्तों ने सोना-चांदी भी बड़े पैमाने पर अर्पित किया है। पिछले 11 महीनों में करीब 592 किलो चांदी और 1.4 किलो से ज्यादा सोना बाबा महाकाल के चरणों में समर्पित किया गया है। इन आभूषणों की अनुमानित कीमत करीब 13 करोड़ रुपये आंकी गई है। मंदिर समिति के अनुसार, यह अब तक का सबसे बड़ा स्वर्ण-रजत दान है। भक्त चांदी के सिंहासन, मुकुट, हार, कड़े और अन्य आभूषण दान कर रहे हैं, जिन्हें विधिवत मंदिर के खजाने में सुरक्षित रखा जा रहा है।
दान से बढ़ेंगी सुविधाएं, श्रद्धालुओं को मिलेगा लाभ
महाकाल मंदिर प्रबंधन का कहना है कि इस भारी भरकम दान का उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधाओं को और बेहतर बनाने में किया जाएगा। मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था को और सुचारू किया जाएगा, श्रद्धालुओं के लिए शेड, पेयजल, स्वच्छता और डिजिटल सुविधाओं को विस्तार मिलेगा। इसके अलावा उज्जैन आने वाले लाखों भक्तों को भीड़ के बीच किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए अतिरिक्त स्टाफ, सुरक्षा और तकनीकी इंतजाम भी किए जा रहे हैं।
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