
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में राज्यसभा की सीट हमेशा विवाद की जड़ रही है। साल 2020 सबको याद है, जब इसी सीट को लेकर सिंधिया और पार्टी नेतृत्व के बीच तनातनी हुई थी और नतीजा यह निकला कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में चले गए। इसके बाद कमलनाथ सरकार गिर गई थी। अब इतिहास खुद को दोहराता नजर आ रहा है। प्रदेश में कांग्रेस को सिर्फ एक चेहरा राज्यसभा भेजना है और इसी एक टिकट के लिए कई दावेदार लाइन में हैं। दिग्विजय सिंह की हालिया राजनीतिक बेचैनी भी इसी ओर इशारा कर रही है कि अंदरखाने बड़ी जंग चल रही है।
‘दो बार से ज्यादा राज्यसभा नहीं’ – खुद दिग्विजय का बयान
हालांकि, दिग्विजय सिंह खुद एक राष्ट्रीय पत्रिका को दिए इंटरव्यू में यह कह चुके हैं कि किसी भी नेता को दो बार से ज्यादा राज्यसभा की जिम्मेदारी नहीं मिलनी चाहिए। वे खुद दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। इसके बावजूद उनके हालिया बयानों और राजनीतिक गतिविधियों से यह अटकलें तेज हैं कि वे एक और कार्यकाल के लिए माहौल बनाने की कोशिश में हैं। इसी बीच पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से उनके रिश्ते भी पूरी तरह सहज नहीं माने जा रहे। उन्हें गोवा प्रभारी बनाया गया था, लेकिन वहां कांग्रेस जीता हुआ चुनाव हार गई। इसके बाद सोनिया गांधी की नाराजगी की खबरें आईं। अब RSS पर दिए गए बयानों से राहुल गांधी के भी नाराज होने की चर्चा है। इन सबके बीच दिग्विजय का भविष्य और भी ज्यादा अनिश्चित दिख रहा है।
कांग्रेस की राज्यसभा लिस्ट में कौन-कौन?
मध्य प्रदेश कांग्रेस से राज्यसभा के लिए दावेदारों की लिस्ट लंबी है। सबसे पहला नाम पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का सामने आता है। कमलनाथ लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं और पार्टी उन्हें संसद के ऊपरी सदन में भेजकर केंद्र की सियासत में फिर मजबूत भूमिका दे सकती है। दूसरा नाम है मीनाक्षी नटराजन का। वे राहुल गांधी की करीबी मानी जाती हैं, जमीनी राजनीति से जुड़ी हैं और मंदसौर से लोकसभा सांसद भी रह चुकी हैं। ऐसे में पार्टी उन्हें नई पीढ़ी के चेहरे के तौर पर आगे बढ़ा सकती है। इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का नाम भी तेजी से उभर रहा है। सवाल यह है कि क्या सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष होना उन्हें राज्यसभा का टिकट दिलाने के लिए काफी है या इसके पीछे 2028 के विधानसभा चुनाव की बड़ी रणनीति है? माना जा रहा है कि कांग्रेस जीतू पटवारी को संसद तक पहुंचाकर उन्हें एक मजबूत राज्यस्तरीय नेता के रूप में स्थापित करना चाहती है।
बीजेपी की खाली होती सीटें और तंज का दौर
इधर, बीजेपी की ओर से भी दो राज्यसभा सीटें – जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी – खाली होने जा रही हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश में राज्यसभा को लेकर सियासी हलचल और तेज हो गई है। जब कैबिनेट मंत्री से नए नामों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब देते हुए कांग्रेस पर तंज कस दिया। उनका कहना था कि कांग्रेस पहले अपने अंदरूनी झगड़े सुलझाए, फिर उम्मीदवारों की बात करे।
आने वाले महीनों में बढ़ेगा सियासी तापमान
कुल मिलाकर देखा जाए तो मध्य प्रदेश में राज्यसभा की सिर्फ एक सीट ने कांग्रेस की राजनीति को फिर से उबाल पर ला दिया है। दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, मीनाक्षी नटराजन और जीतू पटवारी – हर नाम अपने-अपने खेमे को साधने में लगा है। अब देखना यह है कि कांग्रेस नेतृत्व किस पर भरोसा जताता है और क्या दिग्विजय सिंह का सियासी भविष्य एक बार फिर संसद के रास्ते खुलता है या यहीं विराम लग जाता है। इतना तय है कि आने वाले महीनों में MP की राजनीति और ज्यादा गरमाने वाली है।
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