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Khaleda Zia Death: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 साल की उम्र में निधन, एक दिन पहले ही भरा था चुनावी नामांकन

30 दिस, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
Khaleda Zia Death: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 साल की उम्र में निधन, एक दिन पहले ही भरा था चुनावी नामांकन

Khaleda Zia Death: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का 80 साल की उम्र में निधन, एक दिन पहले ही भरा था चुनावी नामांकन

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

बांग्लादेश से मंगलवार सुबह एक ऐसी खबर आई जिसने पूरे देश को गम में डुबो दिया। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख खालिदा जिया का 80 साल की उम्र में निधन हो गया। वे बीते कई दिनों से ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती थीं और हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। मंगलवार सुबह करीब 6 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उनके परिजनों और पार्टी नेताओं ने कर दी है। बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था, ऐसे में जिया का जाना सियासी हलकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।


गंभीर बीमारियों से थीं जूझ रही, 20 दिन वेंटिलेटर पर रहीं

खालिदा जिया लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थीं। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें ‘लीवर सिरोसिस’ की समस्या थी, जो उनकी सेहत पर सबसे ज्यादा असर डाल रही थी। इसके अलावा उन्हें गठिया, डायबिटीज और छाती व हार्ट से जुड़ी दिक्कतें भी थीं। इस साल 23 नवंबर को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी हालत में कोई खास सुधार नहीं हो सका। 11 दिसंबर को जब हालात और खराब हुए तो डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर डाल दिया। बीते 20 दिनों से वे वेंटिलेटर पर ही थीं और उनकी हालत लगातार नाजुक बनी रही।


हेल्थ बुलेटिन में बताया गया था – स्थिति बेहद नाजुक

दो दिन पहले अस्पताल की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन में साफ कहा गया था कि खालिदा जिया की स्थिति बेहद गंभीर है और वे किसी भी वक्त दम तोड़ सकती हैं। सोमवार (29 दिसंबर) को उनकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ गई थी। परिवार और पार्टी नेताओं ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए लंदन ले जाने की तैयारी भी शुरू कर दी थी।

जानकारी के मुताबिक, एक विशेष विमान को स्टैंडबाय पर रखा गया था ताकि जरूरत पड़ते ही उन्हें विदेश ले जाया जा सके, लेकिन हालात ने इतनी मोहलत ही नहीं दी और मंगलवार सुबह उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।


निधन से एक दिन पहले भरा था चुनावी नामांकन

खालिदा जिया के निधन से जुड़ा एक पहलू हर किसी को चौंका रहा है। उन्होंने अपने निधन से ठीक एक दिन पहले, यानी सोमवार (29 दिसंबर) को बोगुरा-7 सीट से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र भरा था। दोपहर करीब तीन बजे पार्टी नेताओं ने उनका पर्चा डिप्टी कमिश्नर और रिटर्निंग अफसर के पास जमा किया था। इस फैसले पर पहले से ही कई सवाल उठ रहे थे क्योंकि जिया उस वक्त वेंटिलेटर पर थीं और उनकी हालत नाजुक बताई जा रही थी। इसके बावजूद BNP ने उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय लिया था। अब उनके अचानक निधन के बाद इस फैसले को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।


राजनीतिक अस्थिरता के बीच देश में शोक की लहर

खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक रही हैं। वे कई बार देश की प्रधानमंत्री रहीं और लंबे समय तक सत्तारूढ़ अवामी लीग की नेता शेख हसीना की सबसे बड़ी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानी जाती थीं। उनके निधन से BNP को न सिर्फ भावनात्मक बल्कि राजनीतिक तौर पर भी बड़ा झटका लगा है। देश पहले से ही राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है, और अब पार्टी की सबसे बड़ी नेता का यूं अचानक चले जाना हालात को और मुश्किल बना सकता है।

BNP के वरिष्ठ नेताओं ने उनके निधन को “देश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति” बताया है। पार्टी दफ्तरों के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटने लगी है और जगह-जगह शोक सभाओं की तैयारी की जा रही है।


आगे क्या? BNP और बांग्लादेश की राजनीति पर असर

खालिदा जिया का जाना सिर्फ एक नेता का निधन नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश की राजनीति के एक पूरे अध्याय का अंत माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि BNP की कमान आगे कौन संभालेगा और पार्टी किस दिशा में जाएगी।


राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में बांग्लादेश की सियासत में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। चुनावी माहौल के बीच यह घटना सत्ताधारी और विपक्ष – दोनों के लिए नई रणनीतियां गढ़ने का कारण बनेगी।

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