
भोपाल। मध्य प्रदेश लोकायुक्त में सामने आए स्टिंग ऑपरेशन के बाद कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख ने तीसरी बार बड़ा कदम उठाते हुए हेड कॉन्स्टेबल यशवंत सिंह ठाकुर और ड्राइवर अमित विश्वकर्मा को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। दोनों कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने एक मामले में वॉयस मैनेजमेंट और केस प्रभावित करने के नाम पर सौदेबाजी की बात कही थी। अब इस मामले में जांच और कार्रवाई दोनों तेज हो गई हैं।
स्टिंग में सामने आईं चौंकाने वाली बातें
स्टिंग ऑपरेशन में ड्राइवर अमित विश्वकर्मा कथित तौर पर केस मैनेज करने के लिए रकम की चर्चा करते नजर आए थे। बातचीत में उन्होंने DSP स्तर के अधिकारियों के नाम लेते हुए लाखों रुपये की मांग का दावा किया था। वहीं हेड कॉन्स्टेबल यशवंत सिंह ठाकुर ने कथित तौर पर ट्रांस्क्रिप्ट में बदलाव के लिए विशेष बोली की प्रैक्टिस करने जैसी बातें कही थीं। इन खुलासों के बाद विभागीय स्तर पर सख्त रुख अपनाया गया।
SP स्तर पर भी हुआ बड़ा फेरबदल
कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं रही। शुक्रवार सुबह भोपाल, सागर और रीवा संभाग में पदस्थ तीन पुलिस अधीक्षकों (SP) के तबादले भी किए गए। आदेश के अनुसार दुर्गेश कुमार राठौर को भोपाल से सागर भेजा गया है। योगेश्वर शर्मा को सागर से रीवा और सुनील पाटीदार को रीवा से भोपाल संभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दो दिन में कई अधिकारियों पर गिरी गाज
स्टिंग ऑपरेशन के बाद अब तक कुल दो DSP, तीन हेड कॉन्स्टेबल, एक कॉन्स्टेबल और एक ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। लगातार हो रही कार्रवाई से यह संकेत मिल रहा है कि लोकायुक्त नेतृत्व मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।
दो DSP के निलंबन का प्रस्ताव DGP को भेजा
स्टिंग ऑपरेशन के दूसरे चरण में DSP स्तर के अधिकारियों की कथित भूमिका सामने आने के बाद DSP बीएम द्विवेदी और DSP मंजू सिंह को लोकायुक्त से हटाकर पुलिस मुख्यालय (PHQ) अटैच कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार दोनों अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव DGP कैलाश मकवाना को भेजा गया है। अंतिम निर्णय आने के बाद इस मामले में और बड़े प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।
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