
ओरछा। मंगलवार को विवाह पंचमी के अवसर पर ओरछा में ऐतिहासिक और धार्मिक उत्सव देखने को मिला। बुंदेली राजसी परंपरा के अनुसार राजा राम दूल्हा बने और बारात निकाली गई। बारात नगर भ्रमण करते हुए जानकी मंदिर तक पहुंची जहां श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर था। जैसे ही पालकी आगे बढ़ी, मानस की चौपाई गूंजी — “राम सरिस बरू दुलहिनि सीता, समधी दसरथु जनकु पुनीता।” भीड़ में मौजूद हर श्रद्धालु को लगा जैसे त्रेता युग खुद को फिर से दोहरा रहा हो।
शाही रस्में, बुंदेली ठाठ — अद्भुत नजारा
शाम 7 बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा परिसर गूंज उठा।
कलेक्टर जमुना भिड़े ने प्रभु का तिलक किया, इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और अन्य गणमान्य अतिथियों ने तिलक कर पालकी को कंधा दिया। दूल्हे राजा ने सोने का मुकुट नहीं बल्कि बुंदेली संस्कृति के अनुसार खजूर के पत्तों से बना मुकुट धारण किया। पालकी के दोनों ओर छत्र और चंवर की छटा बुंदेला साम्राज्य के वैभव को जीवंत कर रही थी।
बारात में अद्भुत व्यवस्था और उमड़ा भक्तों का सैलाब
बारात में शामिल थे—
✔ सूर्यकुल का चिह्न
✔ चांदी की छड़ी
✔ मशालची
✔ सशस्त्र जवानों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर
बरसों की आस्था का ये पल देखते ही श्रद्धालु पालकी को कंधा देने उमड़ पड़े। जानकी मंदिर पहुंचने पर पुजारी हरीश दुबे ने सवा रुपए का टीका किया और शुभाक्षर गूंज उठे।
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