
भोपाल। प्रदेश में अगले साल होने वाली जनगणना को लेकर सरकार ने कमर कस ली है। इस बार जनगणना सिर्फ आंकड़ों की कवायद नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की बड़ी जिम्मेदारी बनने जा रही है। गृह विभाग के ताजा निर्देशों के बाद अब हर स्तर पर अधिकारी तय कर दिए गए हैं और साफ कर दिया गया है कि काम में लापरवाही या बाधा डालने पर जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान रहेगा।
किसे सौंपी गई कौन-सी जिम्मेदारी
गृह विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जनगणना का काम किस अधिकारी की निगरानी में होगा। इसके तहत—
संभागायुक्त को बनाया गया है – संभागीय जनगणना अधिकारी
कलेक्टर होंगे – जिले के प्रमुख जनगणना अधिकारी
कलेक्टर द्वारा नामित अपर कलेक्टर / संयुक्त कलेक्टर / डिप्टी कलेक्टर – जिला जनगणना अधिकारी
जिला योजना अधिकारी या जिला सांख्यिकी अधिकारी – अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी
एसडीएम (अनुविभागीय अधिकारी राजस्व) – अनुविभागीय जनगणना अधिकारी
तहसीलदार – चार्ज जनगणना अधिकारी
अतिरिक्त या नायब तहसीलदार – अतिरिक्त चार्ज जनगणना अधिकारी
शहरी क्षेत्रों में भी जिम्मेदारियां तय की गई हैं—
नगर निगम प्रशासक या आयुक्त – प्रमुख जनगणना अधिकारी
आयुक्त द्वारा नामित अपर आयुक्त / उपायुक्त / वरिष्ठ अधिकारी – नगर जनगणना अधिकारी
जोनल अधिकारी – जोनल चार्ज जनगणना अधिकारी
नगर पालिका / नगर परिषद के सीएमओ या सीईओ – चार्ज जनगणना अधिकारी
कैंटोनमेंट बोर्ड और विशेष क्षेत्र के सीईओ – विशेष क्षेत्र चार्ज जनगणना अधिकारी
यानी अब ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक हर कोने में जनगणना की कमान तय हाथों में होगी।
जनगणना में रुकावट डाली तो होगी सजा
गृह विभाग ने जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 का हवाला देते हुए साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति जनगणना अधिकारी के काम में बाधा डालता है, जानबूझकर जनगणना से इनकार करता है या किसी भी तरह से जनगणना प्रक्रिया में रुकावट पैदा करता है, तो उसके खिलाफ एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इतना ही नहीं, दोष सिद्ध होने पर तीन साल तक की सजा भी हो सकती है। सरकार का मानना है कि जनगणना देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद होती है, ऐसे में किसी भी स्तर पर ढिलाई या विरोध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
13 विभागों के अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारी
केवल प्रगणक ही नहीं, बल्कि गृह विभाग ने अलग-अलग क्षेत्रों और विभागों से जुड़े 13 अधिकारियों को भी जनगणना संबंधी दायित्व सौंप दिए हैं। ये अधिकारी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में यह सुनिश्चित करेंगे कि जनगणना से जुड़ा हर काम समय पर और सही तरीके से पूरा हो। इन अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने पदस्थापना क्षेत्र में जनगणना के हर पहलू के लिए जिम्मेदार होंगे। किसी भी तरह की गड़बड़ी सीधे उनकी जवाबदेही मानी जाएगी।
31 दिसंबर को फ्रीज होंगी प्रशासनिक सीमाएं
जनगणना की सबसे अहम कड़ी है – प्रशासनिक सीमाओं का फ्रीज होना। राज्य सरकार ने तय किया है कि 31 दिसंबर को प्रदेश की सभी प्रशासनिक सीमाएं स्थिर कर दी जाएंगी। इसका मतलब साफ है कि— जिलों, तहसीलों, थानों, जनपदों, राजस्व अनुविभागों और अन्य प्रशासनिक इकाइयों की जो स्थिति 31 दिसंबर को होगी, वही जनगणना पूरी होने तक मान्य रहेगी। इसके बाद राज्य सरकार इन सीमाओं में कोई बदलाव नहीं कर सकेगी। इस संबंध में राज्य शासन द्वारा लिखित सूचना जनगणना निदेशालय भोपाल और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी।
क्यों जरूरी है सीमाओं को फ्रीज करना
अक्सर देखा गया है कि जनगणना के दौरान जिले या तहसील का परिसीमन बदलने से आंकड़ों में गड़बड़ी हो जाती है। इस बार सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। सीमाएं फ्रीज होने से— आंकड़ों की शुद्धता बनी रहेगी, जनसंख्या की सही गणना हो सकेगी और विकास योजनाओं की प्लानिंग ज्यादा सटीक होगी। यही वजह है कि 31 दिसंबर के बाद कोई नया जिला, तहसील या थाना बनाने की प्रक्रिया पर ब्रेक लग जाएगा।
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