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कार्यकर्ताओं की समस्याओं के लिए एमपी बीजेपी शुरू कर रही ‘सहयोग सेल’, अब भोपाल दौड़ घटेगी—जिला स्तर पर ही मिलेगा समाधान

17 जन, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
कार्यकर्ताओं की समस्याओं के लिए एमपी बीजेपी शुरू कर रही ‘सहयोग सेल’, अब भोपाल दौड़ घटेगी—जिला स्तर पर ही मिलेगा समाधान

कार्यकर्ताओं की समस्याओं के लिए एमपी बीजेपी शुरू कर रही ‘सहयोग सेल’, अब भोपाल दौड़ घटेगी—जिला स्तर पर ही मिलेगा समाधान

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में 22 साल से सत्ता संभाल रही भारतीय जनता पार्टी अब अपने कार्यकर्ताओं और आम लोगों की नाराजगी दूर करने के लिए नया प्रयोग करने जा रही है। भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में लगने वाली भीड़ और छोटे-छोटे कामों के लिए राजधानी तक भागदौड़ को देखते हुए पार्टी ने “सहयोग सेल” नाम की विशेष व्यवस्था शुरू करने का फैसला लिया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कहना है कि इस पहल से न केवल कार्यकर्ताओं की समस्याओं का तेजी से हल होगा, बल्कि संगठन और सरकार के बीच तालमेल भी मजबूत बनेगा।


क्यों पड़ी नई व्यवस्था की जरूरत?

हेमंत खंडेलवाल के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद प्रदेश कार्यालय में रोजाना बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंच रहे थे। इनमें से अधिकतर वे लोग थे, जिनकी समस्याओं का समाधान जिला स्तर पर ही संभव था। बावजूद इसके लोग भोपाल आ रहे थे, जिससे न केवल समय बर्बाद हो रहा था बल्कि कार्यालय पर अनावश्यक दबाव भी बढ़ रहा था। इसी स्थिति को संभालने के लिए सहयोग सेल का मॉडल तैयार किया गया है।


क्या है सहयोग सेल का ढांचा?

नई व्यवस्था के तहत प्रदेश और जिला स्तर पर संयोजकों की नियुक्ति की जाएगी। इस सेल में अनुभवी लोगों को जोड़ने की योजना है, जिसमें रिटायर्ड आईएएस अफसरों को भी शामिल करने पर विचार चल रहा है। जिला कार्यालयों में पदाधिकारियों के बैठने के दिन और समय तय किए जाएंगे, ताकि कार्यकर्ता सीधे जिम्मेदार लोगों से मिल सकें। जिला अध्यक्ष से लेकर अन्य पदाधिकारी तय दिनों में कार्यालय में मौजूद रहकर समस्याएं सुनेंगे।


कैसे होगा समस्याओं का समाधान?

यदि जिला कार्यालय में आने वाला मामला प्रशासनिक होगा तो उसे संबंधित विभाग या जिला प्रशासन को भेजा जाएगा। संगठन से जुड़े मुद्दों को जिला अध्यक्ष और प्रभारी मिलकर सुलझाएंगे। जो प्रकरण जिला स्तर पर हल नहीं हो पाएंगे, उन्हें प्रदेश कार्यालय की सहयोग सेल को भेजा जाएगा। यहां प्रशासनिक और संगठन—दोनों तरह के मामलों पर कार्रवाई होगी।


मंत्री भी सुन रहे कार्यकर्ताओं की बात

प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर मंत्रियों का विशेष रोस्टर बनाया गया है। सोमवार से शुक्रवार तक रोज एक मंत्री दोपहर 1 से 3 बजे तक प्रदेश कार्यालय में बैठकर कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं। सहयोग सेल के जरिए आने वाले मामलों को संबंधित विभागों के मंत्रियों को भेजकर जवाबदेही तय की जाएगी।


नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच सेतु

प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन ने सभी जिला अध्यक्षों को पत्र भेजकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पत्र में कहा गया है कि सहयोग सेल पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद का स्थायी माध्यम बनेगा। सिर्फ वही प्रकरण यहां आएंगे जिनका समाधान जिला या संभाग स्तर पर संभव न हो और जिनमें मंत्री या प्रदेश पदाधिकारियों के हस्तक्षेप की जरूरत हो।


अनुशासन और समयबद्धता पर जोर

निर्देशों में साफ कहा गया है कि मंत्री और पदाधिकारी अपनी घोषित उपलब्धता का पालन करेंगे। किसी बदलाव की सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से दी जाएगी।

 हर जिले में एक “जिला सहयोग समन्वयक” बनाया जाएगा, जो भोपाल कार्यालय से संपर्क, प्रकरणों का संकलन और फॉलोअप का काम देखेगा।


जनवरी 2026 की ड्यूटी लिस्ट की झलक

प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों और पदाधिकारियों की बैठकों का शेड्यूल जारी कर दिया गया है—

19 जनवरी: मंत्री तुलसी सिलावट, पदाधिकारी मनीषा सिंह

20 जनवरी: मंत्री एदल सिंह कंसाना, पदाधिकारी शैलेंद्र लड्डा

21 जनवरी: मंत्री निर्मला भूरिया, पदाधिकारी डॉ. नंदिता पाठक

22 जनवरी: मंत्री चेतन्य कश्यप, पदाधिकारी जयदीप पटेल

27 जनवरी: मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, पदाधिकारी राजेंद्र सिंह

28 जनवरी: मंत्री राकेश शुक्ला, पदाधिकारी रजनी मालवीय

29 जनवरी: मंत्री कृष्णा गौर, पदाधिकारी बबीता परमार

30 जनवरी: मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, पदाधिकारी अर्चना सिंह

बीच के अवकाश दिनों में कार्यालय बंद रहेगा।


क्या बदलेगा इस पहल से?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह व्यवस्था पार्टी के अंदर बढ़ती दूरी को कम करेगी। कार्यकर्ताओं को अब छोटे कामों के लिए भोपाल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही सरकार के मंत्रियों को जमीनी फीडबैक भी सीधे मिल सकेगा।

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