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मध्यप्रदेश में बाघों की मौत पर सख्ती, 10 जनवरी से ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’, दिन-रात चलेगी जंगलों में गश्त

03 जन, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्यप्रदेश में बाघों की मौत पर सख्ती, 10 जनवरी से ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’, दिन-रात चलेगी जंगलों में गश्त

मध्यप्रदेश में बाघों की मौत पर सख्ती, 10 जनवरी से ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’, दिन-रात चलेगी जंगलों में गश्त

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

मध्यप्रदेश के जंगलों में लगातार बाघों की मौत ने सरकार और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। साल 2025 में अब तक प्रदेश में 56 बाघों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 36 मामलों में शिकार की आशंका जताई गई है। अब इस खतरे पर लगाम लगाने के लिए वन विभाग ने पूरे प्रदेश में ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2’ चलाने का फैसला लिया है। यह अभियान 10 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा और इस दौरान हर जंगल में दिन-रात सघन गश्त होगी।


बाघों की बढ़ती मौतों से हिला विभाग

प्रदेश में बीते एक साल में बाघों की मौत के आंकड़े डराने वाले हैं। जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच कुल 56 बाघों की मौत दर्ज की गई है। इनमें कई मामले सीधे शिकार से जुड़े बताए जा रहे हैं। वन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, सबसे ज्यादा मौतें फरवरी, अप्रैल, मई, अगस्त, अक्टूबर और दिसंबर में सामने आईं। यही वजह है कि ठंड के मौसम में शिकार की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए इस बार और सख्त अभियान की जरूरत महसूस की गई।


हर वन मंडल में नोडल अफसर, हफ्ते-हफ्ते रिपोर्ट

वन बल प्रमुख वी.एन. अंबाड़े ने सभी मुख्य वन संरक्षक, टाइगर रिजर्व के संचालक और वन मंडल अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत:

हर वन मंडल, टाइगर रिजर्व और वन विकास मंडल में उपवन मंडल अधिकारी स्तर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।

यह नोडल अफसर हर हफ्ते वन मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेगा।

ऑपरेशन के दौरान सभी इकाइयों में दिन और रात, दोनों समय गश्त अनिवार्य होगी।

साथ ही तय किया गया है कि

सप्ताह में कम से कम 3 दिन परिक्षेत्र अधिकारी गश्त करेंगे।

2 दिन वन मंडल अधिकारी और उपवन मंडल अधिकारी खुद फील्ड में उतरेंगे।

हफ्ते में 1 दिन क्षेत्र संचालक और मुख्य वन संरक्षक भी गश्त करेंगे।


डॉग स्क्वाड से लेकर मेटल डिटेक्टर तक, हाईटेक तलाशी

ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-2 को असरदार बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल होगा। प्रदेश में मौजूदा 9 डॉग स्क्वाड को अभियान में झोंका जाएगा। इसके अलावा:

संवेदनशील इलाकों और शिकारी-घुमक्कड़ समुदाय के डेरों की तलाशी ली जाएगी।

सर्चिंग के दौरान डॉग स्क्वाड के साथ-साथ मेटल डिटेक्टर का इस्तेमाल होगा।

जंगलों की राजस्व सीमा, बागड़, फेंसिंग वाले इलाकों में विशेष चेकिंग होगी।

बिजली की लाइन के नीचे और आसपास भी गश्त बढ़ाई जाएगी, ताकि करंट फैलाकर शिकार करने वालों पर नजर रखी जा सके।

अगर किसी फंदे में कोई वन्य प्राणी फंसा मिलता है तो तत्काल 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड और 1 स्टेट लेवल रेस्क्यू टीम की मदद से इलाज कराया जाएगा और अपराध दर्ज किया जाएगा।


करंट और फंदे बने सबसे बड़े कातिल

वन विभाग के पोर्टल पर दर्ज मामलों के विश्लेषण में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वर्ष 2014 से 2025 तक फंदे और बिजली के करंट से जुड़े 933 शिकार प्रकरण दर्ज हुए हैं। इनमें:

322 जंगली सूअर

118 नीलगाय

101 तेंदुए

82 चीतल

50 सांभर

36 भालू

39 बाघ

17 राष्ट्रीय पक्षी मोर


इससे साफ है कि जो तरीके मांस के शौकीन लोग अपनाते हैं, उनसे बाघ और तेंदुए जैसे संरक्षित वन्य प्राणी भी मौत का शिकार हो जाते हैं।


पहले भी चला था ऑपरेशन, फिर भी नहीं थमा शिकार

1 दिसंबर 2024 से 31 दिसंबर 2025 तक चलाए गए पहले ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप में भी विभाग ने 931 मामले दर्ज किए थे और 429 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बावजूद शिकार की घटनाएं थमी नहीं, इसी वजह से अब वाइल्ड ट्रैप-2 को और सख्ती से लागू किया जा रहा है। प्रदेश में इस समय 9 टाइगर रिजर्व, 63 सामान्य वन मंडल और 11 परियोजना मंडल हैं, जहां यह अभियान पूरी ताकत के साथ चलाया जाएगा।

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