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भोपाल, इंदौर समेत 6 शहरों में बन रहे एलिवेटेड कॉरिडोर, जानिए किस शहर में कितना काम पूरा हुआ

06 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल, इंदौर समेत 6 शहरों में बन रहे एलिवेटेड कॉरिडोर, जानिए किस शहर में कितना काम पूरा हुआ
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने डी-कंजेशन पॉलिसी के तहत बड़े स्तर पर एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम तेज कर दिया है। शुरुआती चरण में 6 शहरों को शामिल किया गया है।


राजधानी भोपाल से लेकर जबलपुर, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और रीवा तक अलग-अलग चरणों में परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। कुछ स्थानों पर निर्माण तेजी से चल रहा है, जबकि एक शहर में कॉरिडोर तैयार हो चुका है और दूसरे की तैयारी भी शुरू हो गई है।


6 शहरों में अलग-अलग चरण में परियोजनाएं

लोक निर्माण विभाग ने सबसे अधिक ट्रैफिक दबाव वाले इलाकों को प्राथमिकता देते हुए एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित करने की योजना बनाई है। शहरवार स्थिति इस प्रकार है—


भोपाल: बैरागढ़ के लाउखेड़ी से निगम विसर्जन घाट तक 3.7 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर ₹306 करोड़ की लागत से बन रहा है। इसका करीब 80% निर्माण पूरा हो चुका है।


इंदौर: एलआईजी से नवलखा चौराहे तक 7.44 किमी लंबे ₹306 करोड़ के एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण शुरू हो चुका है।


उज्जैन: हरिफाटक फ्लाइओवर और चिमनगंज मंडी चौराहे से इंदौर गेट तक 5.32 किमी लंबा कॉरिडोर ₹945 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है।


जबलपुर: 7 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर ₹1019 करोड़ की लागत से तैयार हो चुका है। विभाग अब शहर में दूसरे कॉरिडोर की तैयारी कर रहा है।


ग्वालियर: आईआईआईटीएम, महारानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा, स्वर्ण रेखा नदी और गिरबाई एबी रोड को जोड़ने वाला 13.3 किमी लंबा फोरलेन कॉरिडोर ₹1065 करोड़ की लागत से बन रहा है, जिसका लगभग 75% कार्य पूरा हो चुका है।


रीवा: यहां एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए डीपीआर (Detailed Project Report) तैयार की जा रही है और इसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा।


डिजाइन तैयार करने से पहले होता है विस्तृत अध्ययन

कॉरिडोर का अंतिम डिजाइन तय करने से पहले कई तकनीकी पहलुओं का विश्लेषण किया जाता है। इनमें शामिल हैं—

  1. प्रतिदिन सड़क से गुजरने वाले वाहनों की संख्या

  2. पीक आवर के दौरान ट्रैफिक जाम की स्थिति

  3. सड़क की क्षमता

  4. दुर्घटनाओं का रिकॉर्ड

  5. भविष्य में यातायात बढ़ने का अनुमान



गूगल डेटा और वैज्ञानिक विश्लेषण से तैयार होगा लेआउट

लोक निर्माण विभाग कॉरिडोर का डिजाइन तैयार करने से पहले हर घंटे के ट्रैफिक डेटा का विश्लेषण करता है। इसके लिए गूगल से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया जाता है, जिससे पीक आवर के दौरान यातायात की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।


इसी अध्ययन के आधार पर कॉरिडोर का लेआउट और डिजाइन तैयार किया जाता है। विभाग के अनुसार, डिजाइन ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय से तैयार कराया जा रहा है और इसमें सड़क सुरक्षा मानकों का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।


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