
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने शासकीय कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दों पर फैसले किए हैं। इनमें पदोन्नति, महंगाई भत्ता, एरियर, भत्ते, संविदा सेवा, आवास और महिला कर्मचारियों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
पेंशन व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों के लिए क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर स्तर पर अधिकतम समय निर्धारित है और तय अवधि में काम पूरा नहीं होने पर संबंधित स्तर की जवाबदेही तय की जाएगी।
2016 के बाद से लंबित पदोन्नति पर आगे बढ़ी प्रक्रिया
वर्ष 2016 के बाद लंबित पदोन्नति प्रक्रिया कर्मचारियों के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रही है। सरकार ने इसे आगे बढ़ाने की दिशा में निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभागीय पदोन्नति समितियों यानी DPC की प्रक्रिया नियमित रूप से आयोजित करने पर जोर दिया है। उनके निर्देश के अनुसार सितंबर में DPC की प्रक्रिया पुनः शुरू की जानी है।
DA बढ़कर 58 प्रतिशत हुआ
कर्मचारियों को महंगाई से राहत देने के लिए महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की गई है।
2025 में DA: 55 प्रतिशत
2026 में अतिरिक्त वृद्धि: 3 प्रतिशत
वर्तमान DA: 58 प्रतिशत
सरकार ने कर्मचारियों के लंबित महंगाई भत्ते से जुड़े एरियर के भुगतान की व्यवस्था भी की है।
पेंशनर्स और परिवार पेंशनर्स को भी राहत
कार्यरत कर्मचारियों के साथ पेंशनर्स और परिवार पेंशनर्स के लिए भी महंगाई राहत का लाभ देने की व्यवस्था की गई है। इन लाभों को समय-समय पर केंद्र सरकार की ओर से दी जा रही सुविधाओं के अनुरूप देने की बात कही गई है। सेवानिवृत्त और दिवंगत कर्मचारियों से जुड़े एरियर भुगतान के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।
स्थानांतरण और भत्तों को व्यवस्थित करने की पहल
स्थानांतरण नीति के जरिए अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है। ई-ऑफिस जैसी व्यवस्थाओं के जरिए प्रक्रिया में पारदर्शिता और बेहतर संचालन पर जोर दिया गया है। सातवें वेतनमान के अनुरूप शासकीय सेवकों को मिलने वाले विभिन्न भत्तों को व्यवस्थित करने के लिए उनके पुनरीक्षण की दिशा में भी पहल की गई है।
संविदा कर्मचारियों के लिए भी व्यवस्था
शासन की सेवाओं में बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी काम कर रहे हैं। सरकार ने संविदा नीति के माध्यम से उनकी सेवा से संबंधित प्रावधानों को व्यवस्थित किया है। पात्र संविदा कर्मचारियों को नियमित पदों पर अवसर देने की व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
वेतन विसंगति और ग्रेड-पे पर आयोग
वेतन विसंगति, ग्रेड-पे और पदनाम परिवर्तन जैसे विषय लंबे समय से कर्मचारियों की मांगों में शामिल रहे हैं। इन मामलों के समाधान के लिए सरकार ने आयोग गठित करने की घोषणा की है।
कर्मचारियों के आवास निर्माण पर जोर
सरकारी कर्मचारियों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। पुलिस विभाग में हजारों आवासों का निर्माण कराया गया है। अन्य विभागों में भी आवास निर्माण का काम जारी है।
सरकारी नौकरियों में महिलाओं का आरक्षण 35 प्रतिशत
महिला सशक्तिकरण से जुड़े फैसले के तहत शासकीय सेवाओं में महिलाओं का आरक्षण 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत किया गया है। इसके अलावा शासकीय महिला कर्मचारियों की पारिवारिक और व्यक्तिगत आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 7 दिन का अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश देने की व्यवस्था की गई है।
अब पेंशन फाइल पर हर स्तर की जिम्मेदारी तय
पेंशन मामलों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि पेंशन अधिकार में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उनका कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन शुरू होने में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। नई व्यवस्था में किसी पेंशन प्रकरण को क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर के तीन स्तरों से गुजरना होगा। प्रत्येक स्तर के लिए अधिकतम समय निर्धारित किया गया है।
नवीन पेंशन प्रकरण के लिए 15 कार्य दिवस
सामान्य नवीन पेंशन प्रकरण में तीनों स्तरों के लिए कुल 15 कार्य दिवस की समय-सीमा निर्धारित है। प्रत्येक स्तर पर अधिकतम 5-5 कार्य दिवस में कार्रवाई पूरी करनी होगी।
स्तर अधिकतम समय
क्रियेटर 5 कार्य दिवस
वेरीफायर 5 कार्य दिवस
एप्रूवर 5 कार्य दिवस
कुल 15 कार्य दिवस
व्यवस्था का उद्देश्य ऑनलाइन प्रक्रिया के साथ-साथ पेंशन मामलों को समयबद्ध और जवाबदेह बनाना है।
पुनरीक्षित पेंशन सिर्फ 10 दिन में
पुनरीक्षित पेंशन प्रकरणों के लिए समय-सीमा और कम रखी गई है।
क्रियेटर — 4 कार्य दिवस
वेरीफायर — 3 कार्य दिवस
एप्रूवर — 3 कार्य दिवस
कुल — 10 कार्य दिवस
मुख्यमंत्री ने निर्धारित अवधि में प्रकरणों का निराकरण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
वेतन निर्धारण के लिए 11 कार्य दिवस
वेतन निर्धारण के मामलों में भी प्रत्येक स्तर के लिए अलग समय तय किया गया है। क्रियेटर को 5 कार्य दिवस, जबकि वेरीफायर और एप्रूवर को 3-3 कार्य दिवस में अपनी कार्रवाई पूरी करनी होगी। इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए अधिकतम 11 कार्य दिवस निर्धारित हैं।
रिटायरमेंट से पहले तैयार होगा पेंशन प्रकरण
आगामी महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के अग्रिम पेंशन प्रकरणों में स्वीकृति की कार्रवाई वित्त विभाग के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार तय समय में पूरी करनी होगी। व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद पेंशन शुरू करने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
2025 में बना था केंद्रीकृत पेंशन सेल
शासकीय सेवकों के पेंशन प्रकरणों के तेजी से निराकरण के लिए वित्त विभाग ने 9 जून 2025 के आदेश के जरिए राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल (SCPPC) का गठन किया था। 1 अप्रैल 2026 से पहले लागू व्यवस्था समाप्त कर ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों का निराकरण SCPPC के माध्यम से किया जा रहा है।
SCPPC को मिली कई अहम जिम्मेदारियां
राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल को केवल नए पेंशन मामलों के निराकरण तक सीमित नहीं रखा गया है।
इसके दायरे में:
नवीन पेंशन प्रकरणों का निराकरण
पुनरीक्षित पेंशन प्रकरणों की स्वीकृति
सेवानिवृत्ति से 2 वर्ष पूर्व तक विभागीय सक्षम अधिकारियों द्वारा किए गए वेतन निर्धारण का अनुमोदन
शामिल है।
देरी हुई तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही
नई व्यवस्था के बाद पेंशन प्रकरण किसी कार्यालय या अधिकारी के स्तर पर अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रह सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि निर्धारित समय में मामला पूरा नहीं होने पर संबंधित स्तर की जवाबदेही तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।
इस व्यवस्था से यह पता लगाना आसान होगा कि कोई पेंशन प्रकरण किस स्तर पर और कितने समय से लंबित है। उद्देश्य पेंशन प्रक्रिया को केवल ऑनलाइन बनाना नहीं, बल्कि उसे समयबद्ध और जवाबदेह बनाना है।
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