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मध्य प्रदेश में बढ़ीं हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, हर 100 में 27 गर्भवतियां खतरे में; AIIMS ने बताया बड़ा कारण

10 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्य प्रदेश में बढ़ीं हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, हर 100 में 27 गर्भवतियां खतरे में; AIIMS ने बताया बड़ा कारण
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में गर्भवती महिलाओं की सेहत को लेकर चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत पिछले 6 महीने में हुई 6.5 लाख जांचों में 1.75 लाख महिलाओं को हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में रखा गया। यानी प्रदेश में हर 100 गर्भवती महिलाओं में लगभग 27 महिलाएं हाई-रिस्क श्रेणी में हैं। सबसे ज्यादा चिंता राजधानी भोपाल को लेकर सामने आई है, जहां 31.1 प्रतिशत गर्भवतियां हाई-रिस्क श्रेणी में पाई गईं।


AIIMS भोपाल की स्टडी में वायु प्रदूषण को बताया बड़ा कारण

AIIMS भोपाल के हालिया अध्ययन के अनुसार, हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कण सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर प्लेसेंटा (अपरा) तक पहुंच सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे प्लेसेंटा में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और रक्त प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे गर्भस्थ शिशु तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती।


किन कारणों से बढ़ रहा हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी का खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार हाई-रिस्क श्रेणी में शामिल महिलाओं में सबसे अधिक एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर और गर्भकालीन मधुमेह के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा 35 वर्ष से अधिक आयु में गर्भधारण, मोटापा, जुड़वा या बहुभ्रूण गर्भावस्था और पहले की गर्भावस्था में आई जटिलताएं भी जोखिम को कई गुना बढ़ा रही हैं।


प्लेसेंटा पर प्रदूषण का गंभीर असर

एम्स के अध्ययन में पाया गया कि जहरीले कण प्लेसेंटा के ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे बच्चे तक रक्त, ऑक्सीजन और पोषण पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। शोध के अनुसार प्रदूषण IGFBP3 नामक महत्वपूर्ण जीन की सक्रियता को भी प्रभावित करता है, जो भ्रूण के सामान्य विकास में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा लेड, कैडमियम और एंटीमनी जैसी भारी धातुएं भी प्लेसेंटा में जमा होकर शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास पर असर डाल सकती हैं।


हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में किन जटिलताओं का खतरा?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में कई गंभीर समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है।

- प्रीक्लेम्पसिया और हाई ब्लड प्रेशर

- 37 सप्ताह से पहले प्री-टर्म डिलीवरी

- गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर असर

- जन्म के बाद न्यूरोलॉजिकल और व्यवहार संबंधी समस्याओं का बढ़ा जोखिम

- स्टिलबर्थ यानी गर्भ में ही शिशु की मृत्यु का खतरा


गर्भवती महिलाएं कैसे रखें अपना ध्यान?

विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्भवती महिलाएं औद्योगिक क्षेत्रों, भारी ट्रैफिक और ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों में जाने से बचें। बाहर निकलना जरूरी हो तो N95 या उससे बेहतर गुणवत्ता का मास्क पहनें। घर के अंदर भी साफ हवा बनाए रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर डॉक्टर से परामर्श और पौष्टिक आहार को प्राथमिकता देना जरूरी है।


विशेषज्ञ की सलाह

एम्स भोपाल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नसीमा के अनुसार, लगभग 20 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हाई-रिस्क श्रेणी में आ रही हैं। उन्होंने बताया कि खून की कमी, हाई बीपी, थायराइड, अधिक उम्र में गर्भधारण और वायु प्रदूषण जैसे कारण इस स्थिति को बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर जांच और उचित इलाज से मां और शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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