
भोपाल। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल शुक्रवार को ‘स्टेट लेवल कंसल्टेशन मीटिंग ऑन हीमोग्लोबिनोपैथीज़ : संकल्प से समाधान’ में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि राज्यपाल मंगुभाई पटेल के मार्गदर्शन व निगरानी में मध्यप्रदेश सिकल सेल और एनीमिया से मुक्ति की दिशा में ऐतिहासिक कार्य कर रहा है। मध्यप्रदेश को इन बीमारियों से पूरी तरह मुक्त कर ‘स्वस्थ व विकसित मध्यप्रदेश’ बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया और अन्य हीमोग्लोबिनोपैथीज महज स्वास्थ्य संबंधी चुनौती नहीं हैं बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य तथा सामाजिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। इनकी रोकथाम के लिए समय पर पहचान, गुणवत्तापूर्ण उपचार, जेनेटिक काउंसिलिंग, जनजागरूकता तथा सामुदायिक सहभागिता को समान रूप से सुदृढ़ करना आवश्यक है। उन्होंने हीमोग्लोबिनोपैथीज के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार सूचना, शिक्षा एवं संचार सामग्री का विमोचन भी किया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जनजागरूकता, जनभागीदारी, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार व विभिन्न विभागों, चिकित्सा संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों के समन्वित प्रयासों से इन बीमारियों के उन्मूलन के लक्ष्य को जल्द प्राप्त किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से शुरू किए गए राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
मध्यप्रदेश समय-पूर्व 100 प्रतिशत स्क्रीनिंग लक्ष्य प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में अब तक 1.32 करोड़ से अधिक नागरिकों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। मध्यप्रदेश समय-पूर्व 100 प्रतिशत स्क्रीनिंग लक्ष्य प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य बना है। वर्तमान में प्रदेश में 40,648 सिकल सेल रोगी, 2,44,761 सिकल सेल वाहक, 1,178 थैलेसीमिया रोगी तथा 857 थैलेसीमिया वाहकों का पंजीयन किया जा चुका है तथा उन्हें आवश्यक उपचार एवं परामर्श सेवाओं से जोड़ा जा रहा है।
उन्नत उपचार सुविधाओं व डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली को किया जाएगा और अधिक मजबूत
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि सिंगल डिजीज अप्रोच से आगे बढ़कर इंटीग्रेटेड हीमोग्लोबिनोपैथीज़ केयर मॉडल की दिशा में कार्य किया जाए, जिसमें सिकल सेल, थैलेसीमिया एवं अन्य हीमोग्लोबिन विकारों की रोकथाम, शीघ्र पहचान, उपचार, पुनर्वास एवं सामाजिक सुरक्षा को एकीकृत रूप से सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सल एएनसी स्क्रीनिंग, नवजात स्क्रीनिंग, परिवार आधारित एवं प्री-मैरिटल जेनेटिक काउंसिलिंग, आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं, सुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेवाओं, बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी उन्नत उपचार सुविधाओं व डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली को और अधिक मजबूत किया जाएगा।
प्रत्येक गर्भवती महिला की समय पर जांच सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक: दीपक चोपड़ा
थैलेसीमिक्स इंडिया के अध्यक्ष दीपक चोपड़ा ने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला की समय पर जांच सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। जिससे गंभीर हीमोग्लोबिन विकारों की समय रहते पहचान हो सके। उन्होंने सुरक्षित एवं सुलभ ब्लड ट्रांसफ्यूजन सुविधाओं का विस्तार करने, समाज में व्यापक जनजागरूकता बढ़ाने तथा रोगियों व उनके परिवारों तक गुणवत्तापूर्ण परामर्श सेवाएं पहुंचाने पर बल दिया।
कार्यक्रम में इनकी रही मौजूदगी
कार्यक्रम में अतिरिक्त मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश दिशा प्रणय नागवंशी, उप संचालक (ब्लड सेल), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रूबी खान, थैलेसीमिक्स इंडिया की सचिव शोभा तुली, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के विशिष्ट वैज्ञानिक डॉ. अतुल कोटवाल, राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय चिकित्सा विशेषज्ञों, विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों, नास्को, पाथ और अन्य विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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