
भोपाल। मध्य प्रदेश में नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के बाद अब पुलिस विभाग के नए मुखिया के चयन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। पुलिस मुख्यालय ने 11 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल तैयार कर गृह विभाग को भेज दिया है।
अब गृह विभाग इस प्रस्ताव की निर्धारित प्रारूप में जांच करेगा और पूरी जानकारी के साथ UPSC को भेजेगा। आयोग तीन अधिकारियों का पैनल तैयार करेगा, जिनमें से राज्य सरकार एक अधिकारी को नया डीजीपी नियुक्त करेगी।
11 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम भेजे गए
पुलिस मुख्यालय द्वारा भेजे गए पैनल में वरिष्ठता के आधार पर इन अधिकारियों के नाम शामिल हैं—
1991 बैच: वरुण कपूर, प्रज्ञा ऋचा, उपेंद्र जैन
1992 बैच: पंकज श्रीवास्तव, आदर्श कटियार, जी अखेतो सेमा
1993 बैच: अनिल कुमार, रवि गुप्ता
1994 बैच: अनंत सिंह, मनमीत सिंह नारंग, राजाबाबू सिंह और डीजी गुप्ता
इनमें अधिकांश अधिकारी स्पेशल डीजी रैंक से जुड़े हैं।
वरिष्ठता में ये तीन अधिकारी सबसे आगे
वरिष्ठता क्रम के अनुसार जेल डीजी वरुण कपूर, होमगार्ड डीजी प्रज्ञा ऋचा और ईओडब्ल्यू डीजी उपेंद्र जैन शीर्ष दावेदारों में माने जा रहे हैं। चयन प्रक्रिया में विशेष रूप से उपेंद्र जैन और प्रज्ञा ऋचा के नाम चर्चा में हैं।
उपेंद्र जैन और प्रज्ञा ऋचा क्यों हैं चर्चा में
उपेंद्र जैन को फील्ड और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर लंबे अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। वे उज्जैन और जबलपुर में एसपी रह चुके हैं तथा एमपी स्पोर्ट्स एंड वेलफेयर, टेलीकॉल, पुलिस हाउसिंग और वर्तमान में ईओडब्ल्यू की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। प्रज्ञा ऋचा के नाम को महिला नेतृत्व के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। यदि उन्हें डीजीपी बनाया जाता है तो मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी महिला आईपीएस अधिकारी को यह जिम्मेदारी मिलेगी। उनकी कार्यशैली में संवेदनशीलता और सहज व्यवहार को प्रमुख विशेषता माना जाता है।
डीजीपी चयन की पूरी प्रक्रिया
राज्य सरकार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल तैयार करते समय इन बिंदुओं को आधार बनाती है—
वरिष्ठता
सेवा रिकॉर्ड
विभिन्न क्षेत्रों का अनुभव
शेष सेवा अवधि
इसके बाद प्रस्ताव UPSC को भेजा जाता है, जहां इंपैनलमेंट कमेटी सभी रिकॉर्ड की जांच करती है।
तीन नाम चुने जाएंगे, सरकार करेगी अंतिम नियुक्ति
UPSC जांच के बाद तीन अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेजती है। सामान्य नियम के अनुसार अधिकारी के पास कम से कम 6 महीने की शेष सेवा अवधि होना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। राज्य सरकार इन्हीं तीन नामों में से एक अधिकारी को नया डीजीपी नियुक्त करती है। नियुक्त डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष निर्धारित होता है, चाहे सेवानिवृत्ति की निर्धारित तिथि इससे पहले ही क्यों न हो।
मौजूदा डीजीपी का कार्यकाल नवंबर 2026 तक
वर्तमान डीजीपी कैलाश मकवाणा का कार्यकाल नवंबर 2026 में पूरा होगा। उनके उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया इसी क्रम में आगे बढ़ रही है।
पुलिस विभाग में 9,662 नई भर्तियों को मंजूरी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस विभाग में 9,662 नई भर्तियों को स्वीकृति दी है। इस निर्णय पर डीजीपी कैलाश मकवाणा ने इसे "सशक्त पुलिस, सुरक्षित मध्यप्रदेश" की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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