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मध्य प्रदेश में अब पेपर लीक करना होगा मुश्किल, प्रश्नपत्र के हर पेज पर दर्ज होगी स्कूल की पहचान

26 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्य प्रदेश में अब पेपर लीक करना होगा मुश्किल, प्रश्नपत्र के हर पेज पर दर्ज होगी स्कूल की पहचान
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में कक्षा 9वीं से 12वीं की परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। अब प्रश्नपत्र के प्रत्येक पेज पर स्कूल की पहचान से जुड़ा कोड दर्ज रहेगा।


इस व्यवस्था की शुरुआत 7 सितंबर से होने वाली त्रैमासिक परीक्षाओं से होगी। प्रश्नपत्र तैयार करने, छपाई और स्कूलों तक पहुंचाने के लिए विभाग ने अलग प्रोटोकॉल तय किया है, ताकि लीक होने की स्थिति में उसके स्रोत की पहचान की जा सके।


हर पेज पर होगी स्कूल की पहचान

नई व्यवस्था के तहत प्रश्नपत्र के हर पेज पर संबंधित स्कूल का डाइस कोड, सील या बोर्ड कोड का वाटरमार्क लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रश्नपत्र को उसके संबंधित स्कूल से सीधे जोड़ना है।


यदि परीक्षा से पहले किसी स्कूल का पेपर बाहर आता है, तो उस पर मौजूद कोड के आधार पर यह पता लगाया जा सकेगा कि प्रश्नपत्र किस संस्थान का है।


जांच में एजेंसियों को मिलेगा अहम सुराग

विभाग की इस व्यवस्था से पेपर लीक की जांच करने वाली एजेंसियों को प्रश्नपत्र के स्रोत तक पहुंचने में सहायता मिलेगी। कोड या वाटरमार्क के जरिए संबंधित स्कूल की पहचान होने से जांच का दायरा अधिक स्पष्ट हो सकेगा।


प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सिर्फ प्रिंटिंग ही नहीं, बल्कि तैयार करने और वितरण की प्रक्रिया को भी निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत संचालित किया जाएगा।


सितंबर की त्रैमासिक परीक्षा से लागू होगा नियम

पहले चरण में यह व्यवस्था कक्षा 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं की सितंबर में आयोजित होने वाली त्रैमासिक परीक्षाओं में लागू होगी।


परीक्षा अवधि: 7 सितंबर से 17 सितंबर तक

परीक्षा दो पालियों में होगी:

- कक्षा 9वीं और 10वीं: सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक

- कक्षा 11वीं और 12वीं: दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक


प्रश्नपत्र तैयार करने से वितरण तक तय प्रक्रिया

स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रश्नपत्रों के निर्माण से लेकर उनकी प्रिंटिंग और संबंधित स्कूलों तक वितरण के लिए विशेष प्रोटोकॉल निर्धारित किया है। इसका मकसद परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, शुचिता और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को मजबूत करना है। नई कोडिंग व्यवस्था से परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र बाहर आने की स्थिति में संबंधित स्कूल तक पहुंचने का रास्ता भी स्पष्ट हो सकेगा।

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