
भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की धीमी रफ्तार अब किसानों की चिंता बढ़ाने लगी है। 5 अगस्त तक राज्य में सामान्य से 19% कम बारिश दर्ज होने के कारण धान, सोयाबीन और मक्का जैसी खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
बारिश की कमी का असर कई जिलों के खेतों में दिखाई देने लगा है। कुछ स्थानों पर किसानों ने फसलों को बचाने के लिए ट्यूबवेल के सहारे सिंचाई शुरू कर दी है, जबकि कृषि विशेषज्ञ उत्पादन में कमी की संभावना जता रहे हैं।
सामान्य से 19 फीसदी कम हुई बारिश
प्रदेश में 5 अगस्त तक औसतन 16.27 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि इसी अवधि में सामान्य वर्षा 19.97 इंच मानी जाती है। इससे स्पष्ट है कि इस बार अब तक राज्य में 19% कम बारिश हुई है।
पूर्वी मध्य प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित
धान उत्पादन के लिए प्रमुख माने जाने वाले पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा की कमी सबसे अधिक दर्ज की गई है।
सामान्य वर्षा: 21.90 इंच
वास्तविक वर्षा: 17.02 इंच
कमी: 22%
वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 15% कम बारिश दर्ज की गई है। राजधानी भोपाल में अब तक 21.87 इंच वर्षा हुई है, जबकि सामान्य आंकड़ा 22.68 इंच है।
खेतों में बढ़ी सिंचाई की जरूरत
बारिश नहीं होने से धान की क्यारियों में नमी कम होने लगी है। भोपाल के कोलार क्षेत्र सहित कई इलाकों में किसानों ने खेतों में पानी की कमी पूरी करने के लिए ट्यूबवेल का सहारा लेना शुरू कर दिया है। कई स्थानों पर इसी माध्यम से रोपाई और सिंचाई का काम किया जा रहा है।
धान, सोयाबीन और मक्का पर असर की आशंका
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक बारिश नहीं होने की स्थिति, जिसे ड्राई स्पेल कहा जाता है, खरीफ फसलों की वृद्धि को प्रभावित करती है।
धान में टिलरिंग (फुटाव) की प्रक्रिया कमजोर पड़ सकती है।
सोयाबीन में फूल और फलियां झड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
मक्का में दाना बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इन परिस्थितियों के चलते इस सीजन में तीनों प्रमुख खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट की आशंका व्यक्त की जा रही है।
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