
भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने 18 जून को वोटिंग की तारीख तय कर दी है और प्रदेश की 3 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प होता दिख रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस और बीजेपी के उम्मीदवारों को लेकर है। इन तीनों सीटों पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 21 जून को खत्म हो रहा है। इनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और बीजेपी के जॉर्ज कुरियन व डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी शामिल हैं। अब नजर इस बात पर है कि दोनों दल किन चेहरों पर दांव लगाते हैं।
कांग्रेस में दिग्विजय की सीट पर कई दावेदार
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे इस बार राज्यसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके बाद पार्टी के भीतर दावेदारों की लंबी कतार दिखाई देने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल, अरुण यादव और सज्जन सिंह वर्मा जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। पार्टी के सामने चुनौती सिर्फ उम्मीदवार तय करने की नहीं, बल्कि समीकरण संभालने की भी है।
कांग्रेस के लिए क्यों मुश्किल हो सकता है चुनाव?
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का गणित पूरी तरह सहज नजर नहीं आ रहा। दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो चुकी है, जबकि विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा वोटिंग नहीं कर पाएंगे। सबसे बड़ा सस्पेंस बीना विधायक निर्मला सप्रे को लेकर बना हुआ है। माना जा रहा है कि उनका रुख अंतिम समय में चुनावी समीकरण बदल सकता है। यही वजह है कि कांग्रेस के लिए हर वोट अहम माना जा रहा है।
बीजेपी फिर जॉर्ज कुरियन पर खेल सकती है दांव
बीजेपी की तरफ से केंद्रीय राज्यमंत्री जॉर्ज Kurian को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की संभावना मजबूत बताई जा रही है। वे केंद्र सरकार में मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री हैं। पार्टी में उनकी पहचान पुराने और भरोसेमंद नेताओं में होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वे 1980 से बीजेपी से जुड़े हुए हैं और दक्षिण भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख अनुवादकों में भी शामिल रहे हैं।
केरल चुनाव हारने के बाद भी क्यों मजबूत हैं कुरियन?
हाल ही में जॉर्ज कुरियन ने केरल की कांजिरापल्ली सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत नहीं सके। इसके बावजूद पार्टी के भीतर उनकी भूमिका कमजोर नहीं मानी जा रही। बीजेपी उन्हें दक्षिण भारत में ईसाई समुदाय के प्रमुख चेहरे के तौर पर देखती है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश कोटे से उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा तेज है।
सुप्रीम कोर्ट से संसद तक का सफर
पेशे से वकील रहे जॉर्ज कुरियन सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर चुके हैं। वे बीजेपी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे पहली बार अगस्त 2024 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे थे। उस समय ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा जाने के बाद सीट खाली हुई थी, जिस पर उपचुनाव के जरिए उन्हें संसद भेजा गया था।
सुमेर सिंह सोलंकी की सीट पर नया आदिवासी चेहरा?
बीजेपी में दूसरी सीट को लेकर भी अंदरखाने चर्चा तेज है। डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी फिलहाल प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और उन्हें संघनिष्ठ आदिवासी चेहरा माना जाता है। मध्य प्रदेश में करीब 22 फीसदी आदिवासी आबादी को देखते हुए पार्टी नए आदिवासी चेहरे पर भी विचार कर सकती है। हालांकि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर ही होगा।
2020 में अचानक सामने आया था सोलंकी का नाम
साल 2020 के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने अचानक सुमेर सिंह सोलंकी के नाम का ऐलान कर सबको चौंका दिया था। उस समय वे सरकारी नौकरी में थे और चुनाव लड़ने के लिए उन्हें तत्काल प्रोफेसर पद से इस्तीफा देना पड़ा था। तकनीकी देरी के बावजूद उनका इस्तीफा मंजूर हुआ और वे चुनाव जीतकर राज्यसभा पहुंचे। अब देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी उन्हें दोबारा मौका देती है या किसी नए चेहरे पर दांव लगाती है।
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