
भोपाल। मध्य प्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों के लिए राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 18 जून को मतदान होना है और उसी दिन नतीजे आने की संभावना है। सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी की संभावित उम्मीदवार सूची को लेकर है, जिसमें कई बड़े नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पार्टी अगले 3 से 4 दिनों में उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर सकती है। ऐसे में सभी की नजरें बीजेपी नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं।
बीजेपी की दो सीटें, कांग्रेस की एक सीट खाली हो रही
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की जिन तीन सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें से दो सीटें बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के पास है। बीजेपी की ओर से केंद्रीय राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी वर्तमान सांसद हैं। वहीं कांग्रेस की सीट पर वरिष्ठ नेता Digvijaya Singh राज्यसभा सदस्य हैं। अब सवाल यह है कि बीजेपी इस बार किन चेहरों को संसद के उच्च सदन में भेजती है।
कैलाश विजयवर्गीय से लेकर नरोत्तम मिश्रा तक चर्चा में
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, संभावित उम्मीदवारों की सूची में कई प्रभावशाली नेताओं के नाम शामिल हैं। इनमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, डॉ. नरोत्तम मिश्रा, अखंड प्रताप सिंह और जीएस डामोर प्रमुख हैं। बताया जा रहा है कि कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के इच्छुक हैं। उन्होंने अपनी यह इच्छा पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाई है। वे 7 बार विधायक रह चुके हैं और संगठन के साथ-साथ सरकार में भी लंबा अनुभव रखते हैं। इसी बीच नरोत्तम मिश्रा का नाम भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिससे उम्मीदवार चयन को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है।
संघ से जुड़े नाम भी रेस में
बीजेपी की संभावित सूची में संघ पृष्ठभूमि से जुड़े कुछ नाम भी चर्चा में हैं। इनमें दीनदयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष अभय महाजन और झाबुआ क्षेत्र में लंबे समय से संगठनात्मक कार्य कर रहे महेश शर्मा शामिल बताए जा रहे हैं। पार्टी इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन कर सकती है। यही वजह है कि अलग-अलग वर्गों के नेताओं के नामों पर विचार किया जा रहा है।
महिला और आदिवासी प्रतिनिधित्व पर भी नजर
महिला प्रतिनिधित्व के लिए पूर्व मंत्री रंजना बघेल का नाम चर्चा में है। वे धार जिले की मनावर सीट से तीन बार विधायक रह चुकी हैं और पूर्व में महिला एवं बाल विकास विभाग संभाल चुकी हैं। आदिवासी वर्ग से वर्तमान सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी के अलावा जीएस डामोर का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। डामोर पहले विधायक और लोकसभा सांसद रह चुके हैं तथा आदिवासी क्षेत्र में उनकी पहचान मजबूत मानी जाती है। उम्मीदवार चयन में सामाजिक समीकरण कितना प्रभाव डालते हैं, इस पर भी राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी हुई है।
एससी वर्ग से लाल सिंह आर्य का नाम आगे
अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य का नाम भी दिल्ली भेजी गई सूची में शामिल बताया जा रहा है। आर्य पूर्व मंत्री रह चुके हैं और भिंड जिले की गोहद सीट से तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं। इससे साफ है कि पार्टी विभिन्न सामाजिक वर्गों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने के मूड में नहीं बीजेपी
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के पास वर्तमान विधानसभा गणित में 63 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए 58 वोट पर्याप्त हैं। यानी कांग्रेस के पास आवश्यक संख्या से 5 वोट अधिक हैं। ऐसे में बीजेपी फिलहाल कांग्रेस वाली तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने के पक्ष में नजर नहीं आ रही। पार्टी नेतृत्व भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान देने से बच रहा है।
आखिर क्यों बदली बीजेपी की रणनीति?
यदि बीजेपी तीसरी सीट पर दावेदारी पेश करती है तो उसे कांग्रेस खेमे से कम से कम 10 विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। तभी उसका आंकड़ा जीत के लिए जरूरी संख्या तक पहुंच सकता है। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, यदि बीना विधायक निर्मला सप्रे और कमलेश्वर डोडियार का समर्थन भी मिल जाए, तब भी बीजेपी को कांग्रेस से अतिरिक्त 8 विधायकों के वोटों की जरूरत पड़ेगी। यही वजह है कि फिलहाल पार्टी की प्राथमिकता अपनी दो सीटों पर मजबूत और संतुलित उम्मीदवारों के चयन पर केंद्रित दिखाई दे रही है। 18 जून से पहले उम्मीदवारों की घोषणा होते ही मध्य प्रदेश की राज्यसभा राजनीति की तस्वीर और स्पष्ट हो जाएगी।
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