
भोपाल के रविंद्र भवन में आज कुछ अलग ही माहौल था। मंच पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दीप जलाते दिखे और सामने बैठे थे प्रदेश भर से आए लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर। लेकिन ये कोई साधारण सरकारी कार्यक्रम नहीं था। यहां बात हो रही थी सड़कों की सेहत सुधारने की, तकनीक से विभाग को स्मार्ट बनाने की और उस बदलाव की, जो आने वाले वक्त में आम आदमी की यात्रा को आसान बना देगा। इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम-सह-प्रशिक्षण सत्र में मुख्यमंत्री ने न सिर्फ कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क नामक दस्तावेज और विभाग की दो साल की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया, बल्कि लोकपथ 2.0 जैसे डिजिटल टूल्स के जरिए PWD को नई दिशा देने का ऐलान भी किया।
पहले फीता-काटू विभाग, अब बनेगा टेक-स्मार्ट सिस्टम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ शब्दों में कहा कि पहले लोक निर्माण विभाग को केवल “नारियल फोड़ने और फीता काटने वाला विभाग” माना जाता था। अधिकारियों की पहचान भी इसी सोच से होती थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के बाद यह सोच बदली है। उन्होंने कहा कि पहले भी संसाधन और तकनीक मौजूद थी, लेकिन उसका सही इस्तेमाल नहीं हो रहा था। अब सरकार का फोकस है कि तकनीक का इस्तेमाल कर शहरों की तस्वीर बदली जाए। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उस दौर में भी टेक्नोलॉजी थी, पर उसका समुचित उपयोग नहीं हो पाया। वहीं राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि वे सकारात्मक नेता प्रतिपक्ष की भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं।
लोकपथ 2.0 ऐप: नागरिकों के हाथ में सड़क निगरानी की ताकत
कार्यक्रम का सबसे अहम हिस्सा रहा लोकपथ 2.0 ऐप। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह ऐप आम लोगों को सड़क रखरखाव में भागीदार बनाएगा। इसके जरिए नागरिक अब:
क्षतिग्रस्त सड़क की फोटो अपलोड कर सकेंगे
शिकायत सीधे संबंधित इंजीनियर तक पहुंचेगी
4 दिन में मरम्मत अनिवार्य होगी
मरम्मत के बाद फोटो अपलोड कर जानकारी दी जाएगी
अगर गलत रिपोर्ट आई तो शिकायतकर्ता रियल टाइम में चेक कर सकेगा
इसके साथ ही लोकपथ 2.0 में रूट प्लानिंग, ब्लैक स्पॉट अलर्ट, SOS सुविधा, सड़क किनारे अस्पताल और अन्य सुविधाओं की जानकारी भी मिलेगी।
“यह विभाग प्रदेश की गति और दिशा तय करता है” – मंत्री राकेश सिंह
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि PWD सिर्फ सड़कें नहीं बनाता, बल्कि पूरे प्रदेश की गति और दिशा तय करता है। उन्होंने बताया कि कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क तैयार करने से पहले वर्चुअल मीटिंग के जरिए 1700 इंजीनियरों से सुझाव लिए गए, जिनमें से 927 इंजीनियरों के इनपुट पर यह फ्रेमवर्क तैयार हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश में पिछले 70 साल में इंजीनियरों के प्रशिक्षण के लिए कोई समर्पित भवन नहीं था, लेकिन अब प्रदेश में एक अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा। लोकपथ ऐप की तारीफ करते हुए मंत्री ने कहा कि गूगल रास्ता तो बताता है, लेकिन लोकपथ 2.0 उससे आगे जाकर ब्लैक स्पॉट से 500 मीटर पहले वॉयस अलर्ट देगा और स्मार्ट ट्रैवल पार्टनर की तरह काम करेगा।
ब्लैक स्पॉट से अस्पताल तक – हर जानकारी एक ही ऐप में
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह ने बताया कि लोकपथ ऐप में रास्ते में आने वाले एक्सीडेंट जोन, ब्लैक स्पॉट और नजदीकी अस्पताल की जानकारी उपलब्ध रहेगी। इस मौके पर करीब 1500 इंजीनियरों को कैपेसिटी बिल्डिंग मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है।
विक्रांत सिंह तोमर ने प्रेजेंटेशन के जरिए बताया कि फ्रेमवर्क के तहत हर इंजीनियर और विभाग का लोक कल्याण सूचकांक तय होगा। मंत्री से लेकर कर्मचारी तक के लिए एक डैशबोर्ड बनेगा, जिसमें प्रदर्शन का पूरा डेटा रहेगा। बेहतर काम करने वालों को अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जाएगा।
अभी लोकपथ ऐप में क्या-क्या है सुविधा?
लोकपथ ऐप 2 जुलाई 2024 को लॉन्च किया गया था। फिलहाल इसमें:
नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे, मुख्य जिला मार्ग और ग्रामीण मार्ग की जानकारी
मरम्मत योग्य सड़कों की फोटो अपलोड करने की सुविधा
शिकायत 4 दिन में हल करने की समय-सीमा
रियल टाइम फीडबैक सिस्टम
जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। आने वाले समय में इसमें और भी एडवांस फीचर्स जोड़े जाएंगे।
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