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मध्यप्रदेश में अब रोबोट जांचेंगे पानी-सीवर की पाइपलाइन, इंदौर की 36 मौतों के बाद सरकार ने शुरू की नई व्यवस्था

21 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्यप्रदेश में अब रोबोट जांचेंगे पानी-सीवर की पाइपलाइन, इंदौर की 36 मौतों के बाद सरकार ने शुरू की नई व्यवस्था
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 36 मौतों के बाद मध्यप्रदेश में पेयजल और सीवर नेटवर्क की अंदरूनी जांच के लिए रोबोटिक तकनीक अपनाई जाएगी। इसके तहत 70 से 900 मिमी व्यास वाली पाइपलाइनों को बिना सड़क खोदे जांचने की व्यवस्था की गई है।


नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषदों को इस तकनीक से पाइपलाइन निरीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। चेन्नई की एक विशेषज्ञ एजेंसी को ₹40 प्रति मीटर की दर से यह काम करने के लिए एम्पैनल किया गया है।


भागीरथपुरा की घटना से सामने आया था बड़ा खतरा

दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल पीने से 36 लोगों की मौत हुई थी। जांच के दौरान पानी में मानव मल से संबंधित बैक्टीरिया पाए गए थे।


जांच में यह भी सामने आया कि सीवर लाइन से रिसा पानी पेयजल लाइन में पहुंच गया था। भागीरथपुरा क्षेत्र में ही 260 ऐसे पॉइंट्स मिले, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिल रहा था।


पूरे प्रदेश में मिले 2.30 लाख से ज्यादा क्रॉसिंग पॉइंट

घटना के बाद सरकार ने GIS प्लेटफॉर्म 'गरुड़' के जरिए प्रदेश की मैपिंग कराई। इस प्रक्रिया में 2.30 लाख से अधिक ऐसे स्थान चिन्हित हुए, जहां सीवर और पेयजल पाइपलाइन एक-दूसरे को क्रॉस कर रही हैं।


आंकड़ों के अनुसार इनमें इंदौर में 30 हजार और भोपाल में 20 हजार से अधिक डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स हैं। इन स्थानों पर सीवर का पानी पेयजल नेटवर्क में पहुंचने का खतरा बताया गया है।


सड़क खोदे बिना पाइप के अंदर पहुंचेगा रोबोट

नई व्यवस्था में पाइपलाइन के भीतर की स्थिति देखने के लिए CCTV क्रॉलर सिस्टम का इस्तेमाल होगा। रोबोट को मौजूदा मैनहोल, एयर रिलीज वाल्व या बनाए गए अस्थायी एक्सेस पॉइंट से पाइप में डाला जाएगा।


इस प्रक्रिया में सड़कों की खुदाई की जरूरत नहीं होगी। रोबोट पाइप के अंदर चलते हुए कैमरे और सेंसर के जरिए स्थिति रिकॉर्ड करेगा।


रोबोटिक जांच में ये काम होंगे

- 70 से 900 मिमी व्यास वाली पाइपलाइनों की जांच

- लीकेज की पहचान

- पाइप में टूट-फूट का पता लगाना

- अवैध कनेक्शन तलाशना

- हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे से वीडियो रिकॉर्डिंग

- सेंसर के जरिए पाइपलाइन का डेटा जुटाना

- करीब 300 मीटर लंबे केबल से रोबोट को जोड़े रखना


₹40 प्रति मीटर में चुनी गई एजेंसी

नगरीय प्रशासन विभाग ने पाइपलाइन निरीक्षण के लिए ₹1.50 करोड़ की अनुमानित लागत वाला टेंडर जारी किया था। काम की निर्धारित अवधि 365 दिन रखी गई थी।


टेंडर में तीन कंपनियों ने दरें पेश कीं। इनमें सबसे कम बोली चेन्नई की पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज (इंडिया) प्रा. लिमिटेड ने दी।


डिजिटल सर्विलॉन्स ने ₹440 प्रति मीटर की बोली लगाई थी, जबकि फॉर्म डील की दर ₹400 प्रति मीटर रही। सबसे कम बोली पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज (इंडिया) प्रा. लिमिटेड ने ₹40 प्रति मीटर की दी।


सबसे कम बोली यानी L1 के आधार पर पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया है। कंपनी 20 अप्रैल 2022 को रजिस्टर्ड हुई थी। इसके डायरेक्टर गणेशन और रेवती हैं।


निकाय जरूरत के हिसाब से देंगे वर्क ऑर्डर

नगरीय प्रशासन विभाग ने चयनित एजेंसी के साथ एक साल का एग्रीमेंट किया है। अब संबंधित नगरीय निकाय अपनी जरूरत के अनुसार एस्टीमेट तैयार करेंगे और उसी आधार पर कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा।


पाइपलाइन निरीक्षण की व्यवस्था में पानी और सीवर नेटवर्क दोनों को शामिल किया गया है।


दूसरे राज्यों में पहले से हो रहा इस्तेमाल

मध्यप्रदेश में रोबोटिक पाइपलाइन निरीक्षण का इस्तेमाल पहली बार किया जाएगा। नीति आयोग के फ्रंटियर टेक नेटवर्क की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार देश के 15 से अधिक राज्यों में यह तकनीक इस्तेमाल हो रही है।


तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित कई राज्यों में रोबोटिक निरीक्षण किया जा रहा है।


Endobots से GIS मैपिंग और लीकेज की जांच

चेन्नई की Solinas के 'Endobots' पाइपलाइनों के भीतर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों और सेंसर की मदद से निरीक्षण कर रहे हैं। इनसे पाइपलाइन की GIS मैपिंग और लीकेज की जांच की जा रही है।

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