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मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग का होगा पुनर्गठन, तीर्थ दर्शन योजना में जुड़ेंगे प्रदेश के ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ

16 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग का होगा पुनर्गठन, तीर्थ दर्शन योजना में जुड़ेंगे प्रदेश के ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग को नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभाग के पुनर्गठन से लेकर धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत और नई अकादमी के गठन तक कई महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की है। इन निर्णयों का असर आने वाले समय में प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन दोनों पर देखने को मिल सकता है।


संस्कृति विभाग का होगा पुनर्गठन

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग की विशेषज्ञताओं और कार्यप्रणाली का बेहतर समन्वय करते हुए संस्कृति विभाग का पुनर्संरचना किया जाए। साथ ही आधुनिक जरूरतों के अनुसार विभागीय गतिविधियों का विस्तार भी किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रभाव और व्यापक होगा।


सम्राट विक्रमादित्य के नाम से बनेगी अलग अकादमी

सरकार ने सम्राट वीर विक्रमादित्य के नाम पर एक अलग अकादमी स्थापित करने का फैसला किया है। इस अकादमी में उनके जीवन, शासन और ऐतिहासिक योगदान पर व्यापक शोध कराया जाएगा। साथ ही इससे जुड़े शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी संचालित होंगे।


मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का होगा विस्तार

सरकार ने बताया कि अब मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में केवल प्रदेश के बाहर के धार्मिक स्थलों तक ही सीमित नहीं रहा जाएगा। योजना में अब मध्यप्रदेश के 2 ज्योतिर्लिंग, जागृत एवं मंशापूर्ण शक्तिपीठों और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी शामिल किया जाएगा। इससे प्रदेश के श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।


धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभागों को मिलकर धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।


श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय परियोजनाओं पर जोर

मुख्यमंत्री ने श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय परियोजना के निर्माण कार्यों में तेजी लाने को कहा। सरकार के अनुसार दोनों परियोजनाएं धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन विकास के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनके समय पर पूरा होने से धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी।


17 सांस्कृतिक लोक और 20 संग्रहालय बन रहे

सरकार के अनुसार प्रदेश में इस समय 17 धार्मिक एवं सांस्कृतिक लोक तथा 20 संग्रहालयों का निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं वर्ष 2023 से अब तक संस्कृति विभाग के तहत लगभग ₹4160 करोड़ के निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं या अंतिम चरण में हैं, जिनका जल्द लोकार्पण किया जाएगा।


महाकाल लोक से ओरछा तक कई परियोजनाएं प्रगति पर

सरकार ने बताया कि श्रीमहाकाल लोक में मूर्ति स्थापना का कार्य जारी है। वहीं ओरछा में भगवान श्रीराम राजा लोक को 6 नई थीम के साथ नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। प्रदेश के सभी सांस्कृतिक लोकों के नियमित संचालन के लिए स्थायी प्रबंधन व्यवस्था भी तैयार की जा रही है।


त्योहारों और मेलों को मिलेगा नया स्वरूप

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आने वाले महीनों में बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों का व्यापक आयोजन किया जाए। श्रावण महोत्सव, भुजरिया पर्व, आल्हा-ऊदल स्मृति आयोजन तथा अन्य मेलों में सभी समाजों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। नागपंचमी के अवसर पर सर्प प्रजातियों के संरक्षण और जैव विविधता का संदेश भी दिया जाएगा।


कलाकारों और पद्म पुरस्कार विजेताओं के लिए भी तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में जन्मे कलाकारों और गायकों को प्रदेश में प्रस्तुति देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही पद्म पुरस्कारों के लिए कलाकारों, समाजसेवियों और पर्यावरणविदों के नाम केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्तावों में संस्कृति विभाग भी अपनी अनुशंसा देगा। प्रदेश के सभी पद्म सम्मान प्राप्त लोगों के आर्थिक सहयोग के लिए स्थायी योजना तैयार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।


शिक्षा और सांस्कृतिक संस्थानों पर भी रहेगा फोकस

सरकार के अनुसार प्रदेश के सभी संगीत महाविद्यालयों और सांची स्थित बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय में डिग्री पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के अधिकारी भी यहां उपलब्ध सुविधाओं का अध्ययन कर रहे हैं।


भोपाल के जगदीशपुर किले को मिलेगी नई पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल के जगदीशपुर स्थित ऐतिहासिक किले को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भविष्य में वहीं राज्य मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों को पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना है।

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