
भोपाल। मध्यप्रदेश में औद्योगिक और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल (एसआईएसएफ) के विस्तार का फैसला किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 3 नई बटालियन गठित करने की घोषणा की है, जिनमें से एक खंडवा में बनाई जाएगी। भोपाल के रवीन्द्र भवन में सोमवार को आयोजित पुलिस विभाग के आभार प्रदर्शन समारोह में मुख्यमंत्री ने पुलिस भर्ती और पदोन्नति से जुड़े कई अहम फैसलों की जानकारी दी। एसआईएसएफ में बैगा, भारिया और सहरिया समुदायों के युवाओं के लिए अलग-अलग कंपनियां बनाने की योजना भी सामने रखी गई है।
खंडवा में बनेगी एसआईएसएफ की पहली बटालियन
मुख्यमंत्री के मुताबिक राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल की तीन बटालियन तैयार की जाएंगी। इनमें से एक का गठन खंडवा में होगा, जबकि बाकी दो बटालियन कहां स्थापित की जाएंगी, इसका फैसला बाद में किया जाएगा। इन बटालियनों का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के औद्योगिक संस्थानों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।
बैगा, भारिया और सहरिया युवाओं के लिए अलग कंपनियां
एसआईएसएफ में प्रदेश के अति पिछड़े जनजातीय समूहों को प्रतिनिधित्व देने की योजना भी बनाई गई है। इसके तहत बैगा, भारिया और सहरिया समुदायों की अलग-अलग कंपनियां गठित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कंपनियों में संबंधित समुदायों के युवाओं को शामिल किया जाएगा। इससे सुरक्षा बल में इन समूहों की भागीदारी बढ़ाने के साथ उन्हें रोजगार का अवसर भी मिलेगा।
जुलाई 2026 में 58 संवर्गों के 27,534 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति
पुलिस विभाग में पदोन्नति की स्थिति पर मुख्यमंत्री ने बताया कि जुलाई 2026 में प्रदेश के सभी विभागों में पदोन्नतियां की गई हैं। पुलिस विभाग में 58 संवर्गों के 27,534 अफसरों और कर्मचारियों को प्रमोशन मिला। पदोन्नति पाने वालों में 30 रक्षित निरीक्षक भी शामिल हैं, जिन्हें पदोन्नत होकर उप पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलने से उनका उत्साह बढ़ा है। उन्होंने पुलिसकर्मियों की वर्दी पर लगे सितारों को उनकी क्षमता और जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कहा कि इससे उनके दायित्व के साथ उनकी गरिमा भी बढ़ती है।
20 हजार रिक्त पदों की समीक्षा के बाद शुरू हुई भर्ती
डीजीपी कैलाश मकवाना ने बताया कि उन्होंने दिसंबर 2024 में डीजीपी की जिम्मेदारी संभालने के बाद पुलिस विभाग की अलग-अलग शाखाओं की समीक्षा कराई। भर्ती एवं चयन शाखा की समीक्षा में करीब 20 हजार पद रिक्त मिले। इनमें सब इंस्पेक्टर, सूबेदार, स्टेनो और एएसआई एम सहित कई पद शामिल थे। डीजीपी के अनुसार इनमें से कुछ पदों पर करीब 8 साल से भर्ती नहीं हुई थी। रिक्तियों के कारण पुलिसकर्मियों पर काम का दबाव बढ़ रहा था। इसे देखते हुए वर्ष 2025 में 6,500 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के सामने रखा गया।
2026 में 9,662 पदों पर भर्ती की अनुमति
डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2026 में 9,662 पदों पर भर्ती की अनुमति मिल चुकी है। विभिन्न संवर्गों में 14,704 उम्मीदवारों का चयन किया जा चुका है। पुलिस बैंड और एफएसएल से संबंधित भर्तियां दूसरे चरण में हैं। डीजीपी के अनुसार कुल 9,751 से अधिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल की क्षमता बढ़ाने के लिए नए पदों को मंजूरी देने और भर्ती करने का सिलसिला जारी रखा जा रहा है।
आठ साल बाद एसआई और सूबेदार भर्ती का रास्ता खुला
डीजीपी कैलाश मकवाना ने बताया कि विभाग की समीक्षा के दौरान सब इंस्पेक्टर और सूबेदार जैसे महत्वपूर्ण पदों पर करीब आठ साल से भर्ती नहीं होने की जानकारी सामने आई थी। उन्होंने इन पदों को पुलिस विभाग की रीढ़ बताते हुए कहा कि लंबे समय तक रिक्तियां रहने का असर कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण पर भी पड़ रहा था। भर्ती नियमों को लेकर उठी आपत्तियों और सवालों का शासन स्तर पर फॉलोअप किया गया। इसके बाद 2025 में सूबेदार और सब इंस्पेक्टर भर्ती के नए नियम जारी किए गए और प्रक्रिया आगे बढ़ी।
नक्सल मोर्चे के लिए हॉक फोर्स में 325 पद मंजूर
डीजीपी ने नक्सल समस्या को आजादी के बाद से देश की बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में शामिल बताया। मध्यप्रदेश में इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद हॉक फोर्स में 325 पद और विशेष सहयोगी दस्ते में 882 पद स्वीकृत किए गए। डीजीपी ने कहा कि लगातार लिए गए फैसलों और नए पदों की मंजूरी के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश नक्सल समस्या से मुक्त होने वाला देश का पहला राज्य बना है।
‘पुलिस की वर्दी पहनने के बाद अलग भाव पैदा होता है’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए वर्दी के महत्व का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पुलिस को लेकर आम धारणा रहती है कि पुलिसकर्मी हंसते नहीं हैं, लेकिन कार्यक्रम में कर्मचारियों के चेहरे पर खुशी देखकर उन्हें संतोष हुआ। उन्होंने कहा कि पुलिस की वर्दी पहनना अपने आप में अलग अनुभव है। उनके मुताबिक देशभक्ति और जनसेवा की प्रतिबद्धता के कारण पुलिस की देश में अलग पहचान है और वर्दी पहनने के बाद व्यक्ति के भीतर जिम्मेदारी तथा साहस का भाव मजबूत होता है।
20 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी रिटायर हुए, सीएम ने जताया मलाल
पदोन्नति में हुई देरी पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विभागीय और तकनीकी कारणों से लंबे समय तक प्रमोशन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। इस अवधि में 20 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात का मलाल है कि कई कर्मचारियों को सेवा अवधि में पदोन्नति नहीं मिल सकी। अब प्रमोशन का रास्ता खुल चुका है और कर्मचारियों को उनकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पदोन्नति मिलने से जो खुशी मिलती है, उसकी तुलना किसी दूसरी उपलब्धि से नहीं की जा सकती।
गृह विभाग अपने पास होने से पुलिस पर ज्यादा ध्यान: मुख्यमंत्री
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार के ढाई साल पूरे हो चुके हैं और गृह विभाग की जिम्मेदारी भी उनके पास है। इसलिए दूसरे विभागों की तुलना में गृह विभाग पर उनका ध्यान थोड़ा अधिक रहता है। उन्होंने कहा कि पुलिस को मजबूत बनाने के लिए नए पदों की मंजूरी, भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया आगे भी जारी रखी जाएगी।
कार्यक्रम में ये अधिकारी रहे मौजूद
भोपाल के रवीन्द्र भवन में हुए कार्यक्रम में डीजीपी कैलाश मकवाना के अलावा अपर मुख्य सचिव गृह विभाग संजय शुक्ला, स्पेशल डीजी सीआईडी पंकज श्रीवास्तव, एडीजी प्रशासन आदर्श कटियार और एडीजी एसएएफ चंचल शेखर मौजूद रहे। डीजीपी कैलाश मकवाना ने पुलिस विभाग की ओर से मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया और नई भर्तियों तथा पदोन्नतियों के लिए आभार व्यक्त किया।
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