रविवार, 13 सितंबर 2026
Logo
Madhaya Pradesh

25 सितंबर से शुरू होगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा, 15 हजार से अधिक बसें चलाने की तैयारी

12 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
25 सितंबर से शुरू होगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा, 15 हजार से अधिक बसें चलाने की तैयारी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश में 25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा की शुरुआत की जाएगी। सरकार का लक्ष्य प्रदेशवासियों को सुरक्षित, आधुनिक और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों से बेहतर तरीके से जोड़ना है।


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में 5 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क और 15 हजार से अधिक बसों के संचालन की योजना तैयार है। डेटा आधारित रूट, डिजिटल तकनीक, ई-बसों और PPP मॉडल के जरिए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नया स्वरूप दिया जाएगा।


55 जिलों में रूट सर्वे, 886 मार्गों की तैयारी

मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश के 55 जिलों में रूट सर्वे पूरा हो चुका है। इसके आधार पर लगभग 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट मार्ग विकसित किए जाएंगे।


सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 75 प्रतिशत विकासखंडों को परिवहन सेवा से जोड़ना है। डॉ. यादव ने कहा कि बसों की संख्या बढ़ने से आम नागरिकों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी।


बसों में GPS, CCTV और पैनिक बटन

नई व्यवस्था में यात्री सुरक्षा के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। बसों में CCTV, GPS, पैनिक बटन और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था होगी।


EV और CNG बसों को प्राथमिकता देने की योजना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-बसों के उपयोग से हर साल लगभग 70 हजार टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन रोका जा सकेगा।


गांवों से शहरों तक बनेगा क्लीन और सेफ सिस्टम

राज्य सरकार का जोर प्रदूषण-मुक्त परिवहन के साथ दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों से जोड़ने पर है। PPP के माध्यम से क्लीन और सुरक्षित बस सिस्टम विकसित किया जाएगा।


इस व्यवस्था में आधुनिक बस टर्मिनल, बस स्टैंड, डिपो और बस स्टॉप जैसी अधोसंरचना के विकास को भी शामिल किया गया है। इससे ग्रामीण, क्षेत्रीय और जिला स्तर की कनेक्टिविटी मजबूत करने का लक्ष्य है।


MPYPIL के जरिए PPP मॉडल पर होगा एकीकरण

मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड यानी MPYPIL की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से बस संचालन, ITMS और परिवहन अधोसंरचना को PPP मॉडल पर एकीकृत रूप से विकसित किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मॉडल का उद्देश्य ऐसा सार्वजनिक परिवहन तंत्र बनाना है, जिसमें सरकार, निजी ऑपरेटर और तकनीक से जुड़े क्षेत्र मिलकर काम करें तथा संचालन अधिक पारदर्शी और जवाबदेह हो।


एक राज्य, एक बस सेवा से रोजगार के अवसर

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ‘एक राज्य, एक बस सेवा’ की अवधारणा से यात्रियों के लिए आवागमन आसान होगा। साथ ही प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


उन्होंने कहा कि दशकों से बंद पड़ी राज्य परिवहन बस सेवा का दोबारा शुरू होना पिछले 20 वर्षों में 360 डिग्री बदलाव के रूप में देखा जा सकता है।


रैपिडो के साथ हुआ एमओयू

फर्स्ट और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए MPYPIL और रैपिडो के बीच एमओयू किया गया है। इसके तहत बस स्टैंड, बस स्टॉप और मेट्रो स्टेशनों जैसे परिवहन केंद्रों की जानकारी रैपिडो के तकनीकी प्लेटफॉर्म से जोड़ी जाएगी।


समावेशी मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं द्वारा संचालित ‘रैपिडो पिंक’ बाइक-टैक्सी सेवा को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इसकी शुरुआत प्रारंभिक चरण में भोपाल और इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी।


मोबिलिटी इनोवेशन चैलेंज में पांच प्रमुख क्षेत्र

‘एमपी मोबिलिटी इनोवेशन चैलेंज 2026’ के जरिए प्रदेश की वास्तविक परिवहन समस्याओं के लिए नई तकनीकों और समाधान तलाशे जाएंगे। इसका फोकस पांच प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा:


AI और डेटा आधारित इंटेलिजेंट मोबिलिटी

वित्तीय एवं परिचालन स्थिरता

समावेशी मोबिलिटी

अवसंरचना और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी

ग्रीन मोबिलिटी


इस पहल में स्टार्टअप्स, MSME, शोधकर्ता, शैक्षणिक संस्थान और नवप्रवर्तक भाग ले सकेंगे। इसका उद्देश्य स्मार्ट, सुरक्षित, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार मोबिलिटी इकोसिस्टम तैयार करना है।


2 हजार से ज्यादा प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

परिवहन से जुड़े समिट में 2,000 से अधिक प्रतिनिधियों और 100 प्रमुख उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। इनमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि, ई-बस और बड़े वाहन निर्माता, सॉफ्टवेयर कंपनियां, ITMS एजेंसियां, वित्तीय संस्थान, ऊर्जा कंपनियां और निजी बस संचालक शामिल रहे।


समिट से बस संचालन, अधोसंरचना, यात्री सुरक्षा, ग्रीन मोबिलिटी, एकीकृत टिकटिंग आधारित PPP मॉडल और आधुनिक ITMS के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग मॉडल तैयार करने का रोडमैप बनाया जाएगा।


सार्वजनिक परिवहन को भविष्य के अनुरूप बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में हाईस्पीड ट्रेन, लॉजिस्टिक कॉरिडोर, डेडीकेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और हाईस्पीड हाईवे का विस्तार हो रहा है। मध्यप्रदेश भी भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए तेज गति से आगे बढ़ रहा है।


उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल में मध्यप्रदेश में 74 हजार किलोमीटर लंबे राजमार्गों का निर्माण हुआ है। दिल्ली-मुंबई सुपर एक्सप्रेसवे कॉरिडोर भी मध्यप्रदेश से 8 लेन के रूप में गुजरता है।


यात्रियों के लिए डिजिटल सेवाओं पर फोकस

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में डिजिटल टिकटिंग और रियल-टाइम पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य यात्रियों को यात्रा से जुड़ी जानकारी अधिक सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराना है।


डॉ. यादव ने कहा कि नई व्यवस्था यात्रियों, बस ऑपरेटरों, सरकार और नई तकनीक अपनाने वाले पक्षों के लिए उपयोगी होगी। सरकार का लक्ष्य “सही बस, सही मार्ग और सही समय” के आधार पर विश्वसनीय परिवहन सेवा उपलब्ध कराना है।


सार्वजनिक परिवहन का नया मॉडल बनाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने निजी बस ऑपरेटरों, बस निर्माता कंपनियों, इंडस्ट्री पार्टनर्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स से प्रदेश में बढ़ते अवसरों को पहचानकर विकास यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान किया।


उनके मुताबिक सार्वजनिक परिवहन का ऐसा उत्कृष्ट मॉडल तैयार करने की जरूरत है, जो यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने के साथ पूरे देश के लिए उदाहरण बन सके। नई सेवा को सरकार ने सभी वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया है।

पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें