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एमपी में 1000 के पार पहुंच सकती है बाघों की संख्या, सीएम मोहन यादव ने गिनाए वन्यजीव संरक्षण के बड़े प्रयास

30 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
एमपी में 1000 के पार पहुंच सकती है बाघों की संख्या, सीएम मोहन यादव ने गिनाए वन्यजीव संरक्षण के बड़े प्रयास
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या अगले साल 1000 के पार पहुंचने का अनुमान है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण के लगातार प्रयासों के कारण प्रदेश ने देशभर में अलग पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश केवल टाइगर स्टेट ही नहीं, बल्कि अब चीता स्टेट और लैपर्ड स्टेट के रूप में भी अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। राज्य सरकार जनभागीदारी के साथ प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण को आगे बढ़ा रही है।


2022 में 785 बाघ, नई गणना में 1000 से अधिक का अनुमान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2016 के दौरान बाघों की संख्या लगभग 250 थी। इसके बाद 2022 की गणना में यह बढ़कर 785 हो गई। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले वर्ष होने वाली नई गणना में मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या 1000 से अधिक दर्ज हो सकती है।


वन्यजीव संरक्षण को बताया सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश अपनी समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बाघ पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता और समृद्ध वनों के प्रतीक हैं। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार सभी वन्यजीवों के संरक्षण के संकल्प के साथ काम कर रही है और इसमें वन समितियों व स्थानीय लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।


वन विभाग के प्रयासों का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग ने आधुनिक तकनीक और नवाचारों के जरिए हाथियों से जुड़े संकट का समाधान किया है। साथ ही वन प्रबंधन में अधिकारियों, कर्मचारियों, वन समितियों और ग्रामीणों की सहभागिता से संरक्षण कार्यों को नई मजबूती मिली है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नए टाइगर रिजर्व की स्थापना की गई है और राज्य के इकलौते कंजर्वेशन रिजर्व का भी गठन किया गया है।


मानव-वन्यजीव सामंजस्य पर भी सरकार का जोर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का यह सौभाग्य है कि दुनिया में यदि कहीं आबादी के सबसे नजदीक बाघ सुरक्षित रूप से रह रहे हैं, तो वह भोपाल और उसके आसपास का क्षेत्र है। उन्होंने इसे प्रदेश की संरक्षण व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और विशेष प्रशिक्षण की मदद से मानव-वन्य प्राणी द्वंद्व को रोकने में उल्लेखनीय सफलता मिली है। प्रशिक्षण के कारण वन्यजीवों और लोगों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित हुआ है।


उपचार और पुनर्वास पर भी विशेष काम

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में वन्य प्राणियों के उपचार और पुनर्वास के लिए भी लगातार कार्य किए गए हैं। उनका कहना था कि संरक्षण केवल वन्यजीवों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि घायल और संकटग्रस्त वन्य प्राणियों के उपचार तथा पुनर्वास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है।


वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी अन्य उपलब्धियां

मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कई अन्य कार्यों का भी उल्लेख किया। इनमें शामिल हैं—

  • चंबल को एशिया की सबसे स्वच्छ जल वाली नदी बताया।

  • कूनो क्षेत्र की नदियों में घड़ियाल छोड़े जाने की जानकारी दी।

  • करीब 100 वर्ष पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसे की पुनर्वसाहट को सफल बताया।

  • प्रदेश के सभी 9 टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण की विभिन्न गतिविधियां संचालित होने की बात कही।


हर साल 28 लाख पर्यटक पहुंचते हैं

मुख्यमंत्री के मुताबिक मध्यप्रदेश के वन्यजीव पर्यटन स्थलों पर हर वर्ष लगभग 28 लाख पर्यटक पहुंचते हैं। इनमें करीब 1 लाख विदेशी पर्यटक भी शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में मध्यप्रदेश का नाम देश और दुनिया में लगातार मजबूत हो रहा है तथा प्रदेश में बाघों के साथ अन्य वन्यजीवों के संरक्षण का भी गौरवशाली इतिहास रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा, "बाघ बचेंगे तो हमारे जंगल बचेंगे।"



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