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मध्य प्रदेश UCC रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी, ST को बाहर रखने और लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने की सिफारिश

14 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्य प्रदेश UCC रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी, ST को बाहर रखने और लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने की सिफारिश
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की प्रक्रिया एक अहम चरण में पहुंच गई है। राज्य सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने सोमवार को अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दी है, जिसमें कई महत्वपूर्ण सिफारिशें शामिल हैं।


रिपोर्ट में अनुसूचित जनजातियों (ST) को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने और लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया गया है। अब सरकार की अगली कार्रवाई के बाद इस रिपोर्ट के आधार पर विधेयक विधानसभा तक पहुंच सकता है।


ST को यूसीसी से बाहर रखने की सिफारिश

समिति ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों (ST) पर समान नागरिक संहिता लागू नहीं की जाए। सिफारिश में आदिवासी समुदायों की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने का आधार रखा गया है।


लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अनिवार्य होगा पंजीकरण

रिपोर्ट के मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव शामिल है। पंजीकरण के बाद इसकी जानकारी संबंधित पुलिस को दी जाएगी। युवक और युवती के माता-पिता को भी सूचना भेजी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति गलत पहचान या भ्रामक जानकारी देकर पंजीकरण कराने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है।


तीन भागों में तैयार की गई अंतिम रिपोर्ट

समिति ने अपनी रिपोर्ट तीन खंडों में तैयार की है। इसका प्रमुख उद्देश्य लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को व्यवस्थित करना है।


पहला खंड

  1. 10 अध्याय

  2. अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और विभिन्न राज्यों के कानूनों का अध्ययन

  3. समिति की सिफारिशें


दूसरा खंड

  1. विधेयक का प्रारूप

  2. 4 भाग

  3. 404 धाराएं

  4. 7 अनुसूचियां

  5. विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण से जुड़े प्रावधान


तीसरा खंड

जनता से प्राप्त 9.58 लाख सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण


मुख्यमंत्री ने समिति का जताया आभार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट तैयार करने पर समिति की अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई तथा सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।


रिपोर्ट को आगे की प्रक्रिया के लिए विधि विभाग को भेज दिया गया है।


मानसून सत्र में पेश हो सकता है विधेयक

रिपोर्ट पर विधि विभाग की प्रक्रिया पूरी होने और कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार इसे विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश कर सकती है।

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