
भोपाल। मध्य प्रदेश में बड़ा कानूनी बदलाव सामने आ सकता है। सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से काम शुरू हो चुका है। डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक में मंत्रियों से यूसीसी का अध्ययन करने को कहा है। यह सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि आने वाले बड़े फैसले की तैयारी मानी जा रही है। इस निर्देश के बाद गृह विभाग ने भी काम तेज कर दिया है, क्योंकि यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने की जिम्मेदारी उसी के पास है।
दिवाली से पहले लागू हो सकता है कानून
सूत्रों के मुताबिक सरकार इस साल दिवाली से पहले UCC लागू करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए जल्द ही राज्य स्तर पर एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाएगी। कमेटी बनने के बाद ड्राफ्ट तैयार होगा और फिर इसे कैबिनेट में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
दूसरे राज्यों के मॉडल का हो रहा अध्ययन
सरकार सीधे कदम उठाने के बजाय पहले अन्य राज्यों के अनुभवों से सीख रही है। उत्तराखंड और गोवा में लागू यूसीसी मॉडल का गहराई से अध्ययन किया जा रहा है, ताकि मध्य प्रदेश के लिए संतुलित और व्यावहारिक कानून तैयार हो सके।
सामाजिक संतुलन सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, एमपी में यूसीसी लागू करना आसान नहीं होगा। राज्य में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय रहते हैं, जिनकी अपनी पारंपरिक व्यवस्था है। 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें ST वर्ग के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में सरकार को हर वर्ग को ध्यान में रखकर संतुलन बनाना होगा।
आदिवासी परंपराएं क्यों बन रहीं चुनौती
मध्य प्रदेश में कई जनजातीय प्रथाएं प्रचलित हैं, जो मौजूदा कानूनों से अलग हैं। जैसे दापा प्रथा, भगेली/लम्सना विवाह, सेवा विवाह और नातरा प्रथा—इन परंपराओं को यूसीसी में शामिल करना या अलग रखना एक बड़ा सवाल बन गया है…
UCC लागू हुआ तो क्या बदलेगा?
अगर यूसीसी लागू होता है, तो पूरे राज्य में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
- सभी धर्मों के लिए शादी और तलाक के नियम समान होंगे
- विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो जाएगा
- बहुविवाह पर पूरी तरह रोक लग सकती है
- बेटियों को संपत्ति में बराबर अधिकार मिलेगा
यह बदलाव सीधे लोगों की निजी जिंदगी और सामाजिक ढांचे को प्रभावित करेंगे।
उत्तराखंड और अन्य राज्यों में क्या नियम हैं
उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन जरूरी हो गया है। वहीं लिव-इन रिलेशनशिप को भी 30 दिन के भीतर रजिस्टर करना अनिवार्य किया गया है, नियम तोड़ने पर सजा का प्रावधान है।
आगे क्या?
फिलहाल सरकार रणनीति बनाकर आगे बढ़ रही है, ताकि कानून लागू करते समय किसी तरह का सामाजिक या राजनीतिक विवाद न हो। अब नजर इस बात पर है कि कमेटी कब बनती है और यूसीसी का ड्राफ्ट कब कैबिनेट के सामने आता है।
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