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मध्य प्रदेश जल संरक्षण में नंबर 1: 5.64 लाख काम, डिंडौरी बना देश का टॉप जिला, सरकार की बड़ी उपलब्धि

27 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्य प्रदेश जल संरक्षण में नंबर 1: 5.64 लाख काम, डिंडौरी बना देश का टॉप जिला, सरकार की बड़ी उपलब्धि
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश जल संरक्षण में देशभर में अव्वल बन गया है। ‘जल संचय भागीदारी’ अभियान में राज्य ने सीधा छठे से पहले स्थान पर छलांग लगाकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।


JSJB अभियान में मध्य प्रदेश नंबर 1, कई राज्यों को पीछे छोड़ा

भारत सरकार के ‘जल संचय भागीदारी’ (JSJB) अभियान में मध्य प्रदेश अब पहले स्थान पर पहुंच गया है। इस सूची में आंध्र प्रदेश दूसरे और छत्तीसगढ़ तीसरे नंबर पर रहे—यानी जल प्रबंधन में एमपी ने पूरे देश के सामने नया मॉडल पेश किया है।


‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से बदली तस्वीर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, इस सफलता के पीछे ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की लगातार मॉनिटरिंग और जनभागीदारी की बड़ी भूमिका रही है। 5 मार्च तक राज्य छठे स्थान पर था, लेकिन कुछ ही हफ्तों में यह उछाल दिखाता है कि अभियान ने जमीन पर असर दिखाया है।


डिंडौरी और खंडवा बने देश के टॉप जिले

राष्ट्रीय स्तर पर जिलों की रैंकिंग में डिंडौरी ने पहला स्थान हासिल किया है, जहां 1,47,217 कार्य दर्ज किए गए। वहीं खंडवा 87,740 कार्यों के साथ दूसरे नंबर पर रहा। इन जिलों की सफलता ने पूरे प्रदेश की रैंकिंग को ऊपर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।


5.64 लाख काम दर्ज, 4.62 लाख पूरे

अभियान के तहत अब तक कुल 5,64,119 कार्यों का पंजीयन किया गया है, जिनमें से 4,62,052 काम पूरे हो चुके हैं। इनमें से 5,42,976 कार्य ग्रामीण क्षेत्रों और 21,143 शहरी क्षेत्रों से जुड़े हैं—जो दिखाता है कि अभियान का फोकस गांवों के साथ शहरों पर भी है।


16 विभाग, 82 गतिविधियां और 6630 करोड़ का लक्ष्य

इस महाअभियान में 16 सरकारी विभागों की 82 प्रमुख गतिविधियों को शामिल किया गया है। पूरे अभियान के लिए 6,630 करोड़ रुपए का वित्तीय लक्ष्य तय किया गया है, जिससे जल संरचनाओं के पुनर्जीवन और नए स्रोतों के निर्माण पर तेजी से काम हो रहा है।


फार्म पॉन्ड और अमृत सरोवर पर खास फोकस

अभियान के तहत फार्म पॉन्ड, अमृत सरोवर और पुराने मनरेगा कार्यों को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा वन भूमि पर जल संरक्षण कार्यों के लिए एक ऑनलाइन ऐप भी तैयार किया गया है, जिससे अनुमति प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनी है—यही इस मॉडल की खास ताकत बन रही है।


जनभागीदारी से बना राष्ट्रीय मॉडल

सरकार का दावा है कि यह सफलता सिर्फ योजनाओं की नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी का नतीजा है। ग्रामीण स्तर पर लोगों की सक्रिय भूमिका ने मध्य प्रदेश को जल संरक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल स्टेट बना दिया है।

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