
भोपाल। मध्य प्रदेश में ठंड एक बार फिर खतरनाक तेवर दिखाने वाली है। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले 48 घंटे प्रदेश के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। 5 या 6 दिसंबर से तापमान में तेज गिरावट और शीतलहर कई इलाकों को अपनी चपेट में ले सकती है। पश्चिमी विक्षोभ हिमालय में बर्फ गिराएगा और वहीं से उठने वाली बर्फीली हवाएं प्रदेश को फिर से ठिठुराने लगेंगी। मौसम विभाग का अनुमान है कि मंगलवार से रात के पारे में 2 से 3 डिग्री की गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसका सीधा असर रात की ठंड पर पड़ेगा और लोग फिर से अलाव और गर्म कपड़ों पर निर्भर होने लगेंगे।
नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ ठंड, दिसंबर में भी राहत नहीं
नवंबर महीने ने इस बार ठंड के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और इसका असर अब दिसंबर, जनवरी व फरवरी में भी बने रहने की उम्मीद जताई जा रही है। बीते रविवार और सोमवार की रात भोपाल, इंदौर समेत 6 जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे चला गया। इंदौर सबसे ठंडा शहर रहा, जहां पारा 8.2 डिग्री तक लुढ़क गया।
प्रमुख शहरों में न्यूनतम तापमान इस तरह दर्ज किया गया:
इंदौर – 8.2 डिग्री
भोपाल – 9.4 डिग्री
ग्वालियर – 12 डिग्री
उज्जैन – 12 डिग्री
जबलपुर – 11.8 डिग्री
पचमढ़ी सबसे सर्द, पहाड़ों जैसी ठंड
प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी इस वक्त सबसे सर्द रहा, जहां न्यूनतम तापमान 6.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।
अन्य ठंडे जिले:
राजगढ़ – 8.2 डिग्री
रीवा और नौगांव – 9.5 डिग्री
शिवपुरी, बैतूल, खजुराहो, खंडवा, दतिया और छिंदवाड़ा – 12 डिग्री से नीचे
दिन में भी नहीं मिली गर्मी से राहत
दिन के तापमान में भी गिरावट लगातार दर्ज की जा रही है। सोमवार को:
मलाजखंड – 23.7 डिग्री
पचमढ़ी और शिवपुरी – 24.2 डिग्री
सिवनी – 24.6 डिग्री
बैतूल – 24.8 डिग्री
भोपाल और धार – करीब 25.6 डिग्री
दिन में भी धूप कमजोर पड़ती दिख रही है, जिससे ठंड का असर और बढ़ गया है।
भोपाल में 15 दिन की शीतलहर, 93 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
भोपाल में इस बार ठंड ने नया इतिहास रच दिया है। राजधानी में लगातार 15 दिनों तक शीतलहर चली, जो कि 1931 के बाद सबसे लंबा दौर है। 17 नवंबर को भोपाल का तापमान गिरकर 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो अब तक का नया रिकॉर्ड है। इससे पहले:
1941 में — 6.1 डिग्री (नवंबर में सबसे कम)
इंदौर में भी तापमान 6.4 डिग्री तक गिरा, जो 25 वर्षों में सबसे कम है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार नवंबर के पहले हफ्ते में ही उत्तर भारत में बर्फबारी शुरू हो गई थी, जिससे ठंडी हवाएं जल्दी मध्य प्रदेश में पहुंच गईं। हवाओं की दिशा बदलने से कुछ दिन राहत जरूर मिली, लेकिन अब पश्चिमी विक्षोभ के दोबारा सक्रिय होने से ठंड फिर बढ़ेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, "जैसे बारिश में जुलाई-अगस्त अहम होते हैं, वैसे ही ठंड के लिए दिसंबर और जनवरी सबसे निर्णायक महीने होते हैं। इन दिनों उत्तर से चलने वाली सर्द हवाएं और पश्चिमी विक्षोभ ठंड को चरम पर ले जाते हैं।"
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