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मध्य प्रदेश में 2027 होगा युवा वर्ष, रोजगार, कौशल और स्टार्टअप पर सरकार का बड़ा फोकस, जानिए पूरी योजना

19 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्य प्रदेश में 2027 होगा युवा वर्ष, रोजगार, कौशल और स्टार्टअप पर सरकार का बड़ा फोकस, जानिए पूरी योजना
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2027 को ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। सरकार की योजना युवाओं के शिक्षा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता और व्यक्तित्व विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की है।


इसके लिए सात स्तंभों वाली रणनीति तैयार की गई है। सरकार ने रोजगार और प्रशिक्षण के साथ स्टार्टअप, खेल, कला-संस्कृति, शोध और नेतृत्व विकास को भी युवाओं की प्रगति से जोड़ा है।


युवाओं के लिए सात स्तंभों पर रणनीति

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं के समग्र विकास के लिए सात प्रमुख क्षेत्रों को रणनीति का आधार बनाया है।

  1. गुणवत्तायुक्त शिक्षा

  2. कौशल विकास

  3. उद्यमिता एवं स्वरोजगार

  4. सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में रोजगार

  5. स्टार्टअप्स को सहयोग

  6. खेल, कला, संस्कृति, शोध एवं अनुसंधान

  7. नेतृत्व क्षमता विकास


राज्य सरकार के अनुसार अब तक 85 हजार से अधिक युवाओं को शासकीय सेवाओं में नियुक्तियां दी गई हैं। वृहद औद्योगिक इकाइयों में भी 50 हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिलने की बात कही गई है।


आईटीआई और ग्लोबल स्किल पार्क में प्रशिक्षण

अगले एक वर्ष में एक लाख से अधिक युवाओं को आईटीआई के माध्यम से प्रशिक्षण देने की योजना है। इसके अलावा हर वर्ष 10 हजार युवाओं को ग्लोबल स्किल पार्क में कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा।


युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल के लिए मध्य प्रदेश में अलग प्लेसमेंट सेल बनाया जाएगा। यह सेल उद्योगों और सरकार के बीच समन्वय का काम करेगा।


10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले युवाओं पर विशेष ध्यान

अगले ढाई वर्ष में उन युवाओं पर विशेष फोकस करने की योजना है, जो किसी कारण से 10वीं की परीक्षा पास नहीं कर सके या 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ चुके हैं। सरकार ने युवाओं को ध्यान में रखते हुए एमएसएमई विकास नीति 2025 तथा स्टार्टअप नीति एवं कार्यान्वयन 2025 लागू की है।


हर जिले में होगा कम से कम एक इंक्यूबेशन सेंटर

प्रदेश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक इंक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने की योजना है। अगले ढाई वर्षों में स्टार्टअप की संख्या 12 हजार से अधिक करने और 100 नए इंक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। युवाओं के लिए ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल पर को-वर्किंग स्पेस भी तैयार किए जाएंगे। ड्रोन, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेसटेक और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।


प्रतियोगी परीक्षाओं के मामलों के लिए 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट

प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े न्यायालयीन मामलों के शीघ्र निराकरण के लिए मुख्यमंत्री ने 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्णय लिया है। सरकार के अनुसार यह व्यवस्था प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित न्यायालयीन मामलों की त्वरित सुनवाई और समाधान के लिए की जाएगी।


छात्रवृत्ति से करोड़ों विद्यार्थियों को लाभ

वर्ष 2023 से 2025-26 तक प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से लगभग 4,54,26,723 विद्यार्थियों को लाभान्वित किए जाने की जानकारी दी गई है।


पिछले 15 वर्षों में प्राथमिक शिक्षा से लेकर विदेश अध्ययन, छात्रवृत्ति, निःशुल्क कोचिंग और प्रशिक्षण जैसी योजनाओं के लिए 13 हजार 156 करोड़ 51 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता दी गई। सरकार के अनुसार इन योजनाओं से प्रदेश के लगभग 5 करोड़ 34 लाख 93 हजार 54 से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं।


जनजातीय बहुल जिलों में 94 सांदीपनि विद्यालय

नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए 19 जनजातीय बहुल जिलों में 94 सांदीपनि विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय, छात्रावास और उत्कृष्ट 8 छात्रावास सहित कुल 1933 छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है। इनमें एक लाख से अधिक सीटें स्वीकृत हैं।


दिल्ली में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए गुणवत्ता वाली छात्रावास सुविधा भी लागू की जा रही है।


स्कूल शिक्षा में कई योजनाओं का विस्तार

सरकार के अनुसार प्राथमिक शिक्षा में ड्रॉपआउट दर को शून्य तक पहुंचाया गया है। विद्यार्थियों को समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए कई योजनाएं संचालित हैं।


इनमें साइकिल योजना, मुख्यमंत्री स्कूटी योजना, लैपटॉप के लिए आर्थिक सहायता, कक्षा 1 से 12 तक निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, निःशुल्क गणवेश और समेकित छात्रवृत्ति योजना शामिल हैं।


पीएम श्री और सांदीपनि विद्यालयों के साथ स्मार्ट क्लास तथा आईसीटी लैब के जरिए डिजिटल शिक्षा का विस्तार किया गया है।


तीन लाख से अधिक बच्चों को फिर स्कूल से जोड़ा

गृह संपर्क अभियान के माध्यम से 3 लाख से अधिक बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़े जाने की जानकारी दी गई है। जनजातीय विद्यार्थियों के लिए नए छात्रावासों को मंजूरी दी गई है।


व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा का विस्तार करने के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सुपर-100 योजना भी संचालित की जा रही है।


बालिकाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा को ध्यान में रखते हुए सैनिटरी नैपकिन योजना लागू की गई है।


विश्वविद्यालयों की संख्या 13 से बढ़कर 81

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश में विश्वविद्यालयों की संख्या 13 से बढ़ाकर 81 किए जाने की जानकारी दी गई है। विद्यार्थियों के प्रवेश के अवसर बढ़ाने के साथ उच्च शिक्षा के बजट में कई गुना वृद्धि कर अधोसंरचना को मजबूत किया गया है। ई-प्रवेश प्रणाली के जरिए उच्च शिक्षा में प्रवेश प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है।


SC और OBC विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और कोचिंग

अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए कक्षा 1 से उच्च शिक्षा तक विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित हैं। विदेश में अध्ययन के लिए भी छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जा रही है।


पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति का लाभ दिया जा रहा है। पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग और कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था के साथ विदेश अध्ययन के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।

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