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उज्जैन महाकाल मंदिर में 3 अप्रैल से शुरू होगा गलंतिका बंधन, दो महीने तक भगवान को अर्पित होगी शीतल जलधारा

30 मार्च, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
उज्जैन महाकाल मंदिर में 3 अप्रैल से शुरू होगा गलंतिका बंधन, दो महीने तक भगवान को अर्पित होगी शीतल जलधारा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

गर्मी बढ़ते ही उज्जैन के महाकाल मंदिर में भक्ति का अनोखा रूप देखने को मिलेगा। भगवान महाकाल को ठंडक पहुंचाने के लिए सदियों पुरानी परंपरा एक बार फिर शुरू होने जा रही है। 3 अप्रैल से शुरू होने वाला यह अनुष्ठान श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखता है।


Mahakaleshwar Temple में शुरू होगा विशेष अनुष्ठान

महाकाल मंदिर में 3 अप्रैल 2026 से ‘गलंतिका बंधन’ की शुरुआत होगी। यह अनुष्ठान वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक यानी करीब दो महीने तक चलेगा। इस दौरान भगवान के शीश पर लगातार ठंडे जल की धारा प्रवाहित की जाएगी—जो भक्ति और सेवा का अनूठा संगम है।


मिट्टी के घड़ों से होती है शीतल जलधारा

इस परंपरा में मिट्टी की मटिकयों (घड़ों) में जल भरकर भगवान शिव के ऊपर धीरे-धीरे गिराया जाता है। पुजारी पहले पवित्र नदियों का आह्वान करते हैं, फिर विधि-विधान से ‘गलंतिका’ बांधते हैं। इसके बाद दिनभर तय समय तक जलधारा चलती रहती है—जिससे मंदिर का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है।


क्या है गलंतिका बंधन, क्यों है खास?

‘गलंतिका बंधन’ एक प्राचीन धार्मिक परंपरा है, जिसका उद्देश्य भगवान शिव को गर्मी से राहत देना है। गर्मी के मौसम में यह अनुष्ठान विशेष रूप से किया जाता है, जिससे भगवान को शीतलता प्रदान की जाती है। यही वजह है कि इस दौरान मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।


वैशाख मास में स्नान और दान का विशेष महत्व

इस अवधि में सिर्फ मंदिर में पूजा ही नहीं, बल्कि धार्मिक कार्यों का भी खास महत्व होता है। श्रद्धालु Shipra River में स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं। पानी का दान, पक्षियों के लिए दाना-पानी और जरूरतमंदों की मदद को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

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