
ग्वालियर से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि समय पर सही पोषण, नियमित निगरानी और परिवार का सहयोग मिल जाए तो कुपोषण जैसी गंभीर चुनौती को भी हराया जा सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रयासों से गंभीर कुपोषण (SAM) की शिकार मासूम माहिका अब सामान्य श्रेणी में पहुंच चुकी है। यह बदलाव केवल सरकारी योजना का परिणाम नहीं, बल्कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सतर्कता और एक मां के अटूट संकल्प की मिसाल भी है।
जनवरी 2026 में सामने आई थी गंभीर स्थिति
विभाग के अनुसार, 14 मार्च 2025 को जन्मी माहिका का स्वास्थ्य कुछ महीनों बाद लगातार गिरने लगा। जनवरी 2026 में आंगनवाड़ी केंद्र पर वजन और लंबाई की जांच के दौरान उसका वजन केवल 5.5 किलोग्राम और लंबाई 68 सेंटीमीटर दर्ज की गई। जांच में बच्ची को SAM (Severe Acute Malnutrition) श्रेणी में पाया गया, जिसके बाद तुरंत विशेष निगरानी शुरू की गई।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने शुरू की विशेष देखभाल
माहिका की गंभीर स्थिति देखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता माधुरी राजावत ने 19 जनवरी 2026 को उसे C-SAM कार्यक्रम में पंजीकृत कराया और नियमित निगरानी शुरू की। बाद में 8वें पोषण पखवाड़े के दौरान परियोजना अधिकारी डॉ. मनोज गुप्ता और सेक्टर पर्यवेक्षक सुमन पांडे ने भी इस मामले की विशेष मॉनिटरिंग की, जिससे उपचार और पोषण संबंधी प्रयासों को और मजबूती मिली।
मां ने अपनाई हर सलाह, बदली बेटी की सेहत
पोषण पखवाड़े के दौरान माहिका की मां मोना को संतुलित भोजन, मोटे अनाज, मौसमी फल-सब्जियों और 'तिरंगा भोजन' के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने आंगनबाड़ी से मिलने वाले टेक होम राशन (THR) का नियमित उपयोग करते हुए पौष्टिक हलवा और खिचड़ी तैयार करना शुरू किया। इसके साथ ही बच्ची के मानसिक विकास के लिए खेल, कवितियां और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
नियमित ग्रोथ मॉनिटरिंग से मिला सकारात्मक परिणाम
आंगनबाड़ी टीम ने लगातार गृहभेंट कर परिवार को मार्गदर्शन दिया और माहिका की हर सप्ताह ग्रोथ मॉनिटरिंग की गई। रिपोर्ट के अनुसार, लगातार देखभाल और पौष्टिक आहार के कारण अब माहिका का वजन और लंबाई दोनों सामान्य श्रेणी में पहुंच चुके हैं। इस सफलता से परिवार के साथ-साथ विभागीय टीम भी उत्साहित है।
कुपोषण के खिलाफ बनी प्रेरक मिसाल
माहिका की कहानी यह संदेश देती है कि समय पर पहचान, सही पोषण, नियमित निगरानी और परिवार की सक्रिय भागीदारी से गंभीर कुपोषण जैसी समस्या पर प्रभावी ढंग से काबू पाया जा सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग का मानना है कि ऐसे प्रयास प्रदेश में कुपोषण मुक्त बचपन की दिशा में मजबूत कदम साबित हो सकते
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