
भोपाल। मध्यप्रदेश में सड़क हादसों के शिकार लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब दुर्घटना के तुरंत बाद इलाज के खर्च की चिंता किए बिना पीड़ितों को “गोल्डन आवर” में तेजी से उपचार मिल सकेगा। केंद्र सरकार की नई पीएम राहत योजना लागू होने के बाद कुछ ही दिनों में कई मामलों के क्लेम भी पहुंचने लगे हैं।
‘गोल्डन आवर’ में मिलेगा त्वरित इलाज
राज्य में 18 फरवरी से शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य दुर्घटना के बाद पहले एक घंटे में मरीज को अस्पताल तक पहुंचाकर जान बचाना है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार यही समय सबसे अहम होता है, क्योंकि समय पर इलाज मिलने से मृत्यु और गंभीर विकलांगता का खतरा काफी कम हो सकता है। हाल ही में बैतूल और छिंदवाड़ा में हुए हादसों के पीड़ितों को भी इसी व्यवस्था के तहत अस्पताल पहुंचाया गया। अब ऐसे मामलों में इलाज का खर्च योजना के जरिए कवर किया जाएगा।
हर सड़क हादसा शामिल, सिर्फ हाईवे नहीं
इस योजना की खास बात यह है कि यह केवल राष्ट्रीय राजमार्गों तक सीमित नहीं है। गांव की सड़क हो या शहर की गली, राज्य मार्ग हो या लोकल रोड किसी भी वाहन से हुई दुर्घटना में घायल व्यक्ति इसका लाभ ले सकता है। इससे ग्रामीण इलाकों में भी आपात चिकित्सा सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
1.5 लाख तक कैशलेस उपचार, जानिए नियम
योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज मिलेगा। उपचार की अवधि और पैकेज को तीन हिस्सों में बांटा गया है:
गैर-गंभीर मामलों में 24 घंटे तक तत्काल इलाज
गंभीर मामलों में 48 घंटे तक इमरजेंसी ट्रीटमेंट
जरूरत पड़ने पर 7 दिन तक आगे का इलाज
मरीज को स्थिर करने के लिए शुरुआती पैकेज लगभग 2000 रुपये से शुरू होता है। अस्पतालों को भुगतान राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की मंजूरी के बाद निर्धारित समय में किया जाएगा।
200 इलाज पैकेज और 1800 अस्पताल जुड़े
इस योजना के दायरे में बेसिक लाइफ सपोर्ट से लेकर जटिल न्यूरोसर्जरी तक करीब 200 उपचार पैकेज शामिल किए गए हैं। प्रदेश में 1800 अस्पताल पहले से सूचीबद्ध हैं। करीब 3200 और अस्पतालों व नर्सिंग होम को जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। अस्पताल चाहें तो पोर्टल के जरिए खुद रजिस्ट्रेशन कर योजना से जुड़ सकते हैं।
हादसे पर तुरंत 112 पर करें कॉल
दुर्घटना होने पर पीड़ित, परिवार या राहगीर 112 हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं। नजदीकी एंबुलेंस भेजी जाएगी, मरीज को सूचीबद्ध अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। एंबुलेंस सेवा का भुगतान अलग से किया जाएगा, ताकि समय पर पहुंचने में कोई बाधा न आए।
खर्च कौन देगा? समझें पूरा सिस्टम
इलाज का भुगतान मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से होगा।
यदि वाहन बीमित है तो बीमा कंपनी खर्च देगी।
हिट एंड रन या बिना बीमा वाले मामलों में केंद्र सरकार खर्च उठाएगी।
इस व्यवस्था से पीड़ित परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है।
डिजिटल सत्यापन और निगरानी भी सख्त
योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिजिटल सत्यापन जरूरी किया गया है।
पुलिस द्वारा हादसे की पुष्टि अनिवार्य
सामान्य मामलों में 24 घंटे और गंभीर मामलों में 48 घंटे में सत्यापन
अब तक करीब 300 अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जिला स्तर पर वरिष्ठ अधिकारी निगरानी करेंगे, जबकि राज्य स्तर पर रोड सेफ्टी काउंसिल समीक्षा करेगी।
क्यों जरूरी है यह पहल? समझिए बैकग्राउंड
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क हादसों में देरी से इलाज मिलने के कारण कई जानें चली जाती हैं। आर्थिक समस्या या अस्पताल पहुंचने में देर सबसे बड़ी वजह बनती है। इस नई व्यवस्था से मरीज को पहले इलाज और बाद में कागजी प्रक्रिया का लाभ मिलेगा, जिससे मृत्यु दर में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
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