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नगर निगमों में बड़ा खुलासा! भोपाल में 3000 फर्जी कर्मचारी पकड़े गए, अब तीन दिन में मांगा गया पूरा हिसाब

10 नव, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
नगर निगमों में बड़ा खुलासा! भोपाल में 3000 फर्जी कर्मचारी पकड़े गए, अब तीन दिन में मांगा गया पूरा हिसाब

नगर निगमों में बड़ा खुलासा! भोपाल में 3000 फर्जी कर्मचारी पकड़े गए, अब तीन दिन में मांगा गया पूरा हिसाब

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश के नगर निकायों में हजारों फर्जी कर्मचारियों का मामला अब तूल पकड़ चुका है। शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग (UAD) ने सभी 413 नगर निकायों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि, नई फेस अटेंडेंस प्रणाली लागू होने के बाद कर्मचारियों की वास्तविक संख्या और वेतन खर्च का पूरा डेटा  तीन दिन के भीतर प्रस्तुत करें।


भोपाल नगर निगम में सबसे बड़ा खुलासा

राजधानी भोपाल नगर निगम (BMC) में ही 3000 से अधिक फर्जी या संदिग्ध कर्मचारी पाए गए हैं। यूएडी के रिकॉर्ड के अनुसार बीएमसी में 19,854 कर्मचारी पंजीकृत हैं, जबकि निगम का दावा है कि केवल 16,000 कर्मचारी ही वास्तविक हैं। यह अंतर फर्जी हाजिरी और वेतन भुगतान में बड़े स्तर की अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।


तीन दिन में मांगी रिपोर्ट

विभाग ने जारी सर्कुलर में सभी नगर निगम आयुक्तों और नगर परिषदों के मुख्य नगर अधिकारियों (CMO) से कहा है कि — आधार-आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम (AEBAS) लागू होने के बाद कितने कर्मचारियों की संख्या घटी और वेतन व्यय में कितनी बचत हुई — इसका विस्तृत डेटा तय फॉर्मेट में तीन दिनों के भीतर जमा करें।


1.39 लाख कर्मचारी नए सिस्टम में पंजीकृत

यूएडी के मुताबिक, प्रदेशभर में लगभग 1.39 लाख नगर निगम कर्मचारी नई फेस रिकग्निशन अटेंडेंस प्रणाली के तहत पंजीकृत हो चुके हैं। यह सिस्टम GPS-सक्षम तकनीक पर आधारित है जो कर्मचारी की उपस्थिति को 30 मीटर के दायरे में सत्यापित करता है। इसका उद्देश्य “भूतिया उपस्थिति” पर रोक लगाना और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना है। 31 अक्टूबर को पंजीकरण की अंतिम तिथि थी।


लापरवाह कर्मचारियों पर गिरेगी गाज

अब इस पहल के तीसरे चरण में उन कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी है जो नियमित रूप से देर से आते हैं या अटेंडेंस दर्ज करने में विफल रहते हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह डिजिटल व्यवस्था नगर निगमों के कामकाज में दक्षता और पारदर्शिता लाने में मदद करेगी।


“यह सिस्टम जवाबदेही बढ़ाने और कामकाज को पारदर्शी बनाने का बड़ा कदम है।”

वरुण अवस्थी, अपर आयुक्त, भोपाल नगर निगम

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