मंगलवार, 07 अप्रैल 2026
Logo
Madhaya Pradesh

CCTV और कपड़ों के सुराग से खुला राज, मंगलसूत्र लूटने वाले चचेरे भाइयों का गैंग धराया

07 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
CCTV और कपड़ों के सुराग से खुला राज, मंगलसूत्र लूटने वाले चचेरे भाइयों का गैंग धराया
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

रिपोर्ट: अतुल जैन 

पिछोर। सड़क पर चलते-चलते गले से मंगलसूत्र झपटने वाले बदमाश आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गए। CCTV फुटेज, कपड़े और जूतों की पहचान ने ऐसा जाल बुना कि शातिर चचेरे भाई बच नहीं सके।


CCTV फुटेज ने ऐसे खोली लुटेरों की पोल

पिछोर अनुभाग में लगातार हो रही मंगलसूत्र लूट की घटनाओं ने पुलिस की नींद उड़ा दी थी। खासकर 29 मार्च 2026 को खनियाधाना बस स्टैंड पर हुई वारदात ने जांच को तेज कर दिया। पुलिस ने इलाके के कई CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और हर क्लिप को जोड़कर एक चेन बनाई। इसी दौरान एक अहम फुटेज मिला, जिसमें आरोपियों के चेहरे साफ नजर आ रहे थे। यहीं से केस ने रफ्तार पकड़ी। अब सवाल था—ये चेहरे किसके हैं? यहीं से कहानी और दिलचस्प हो जाती है।


कपड़े और जूतों से मिला बड़ा सुराग

सिर्फ चेहरे ही नहीं, बल्कि आरोपियों के कपड़े और जूतों ने भी पुलिस को बड़ा क्लू दिया। हर फुटेज में एक जैसी ड्रेसिंग पैटर्न ने शक को पुख्ता किया। पुलिस ने इन सुरागों के आधार पर मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। जल्द ही सूचना मिली कि दो युवक हथियार लेकर नई वारदात की तैयारी में हैं। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया।


घेराबंदी कर दबोचे गए दोनों आरोपी

पुलिस टीम ने बताए गए स्थान पर पहुंचकर घेराबंदी की और दोनों संदिग्धों को पकड़ लिया। तलाशी में उनके पास से कट्टा (देशी पिस्टल) बरामद हुआ। पूछताछ में उनकी पहचान प्रवेन्द्र परिहार (19) और उसके चचेरे भाई विजेन्द्र परिहार (25) के रूप में हुई। जब इनका मिलान CCTV फुटेज से किया गया, तो सारी तस्वीर साफ हो गई। लेकिन खुलासा यहीं नहीं रुका।


एक नहीं, कई लूट की वारदातों का कबूलनामा

पूछताछ में दोनों आरोपियों ने सिर्फ एक नहीं बल्कि कम से कम 5 लूट की घटनाओं को अंजाम देना स्वीकार किया।


इनमें शामिल हैं:

29 मार्च 2026 – प्रवेश जाटव से मंगलसूत्र लूट

28 नवंबर 2025 – अचला लोधी से लूट

27 फरवरी – रीना यादव के जेवर

भौंती और अन्य क्षेत्रों की वारदातें


पुलिस ने दो प्रमुख मामलों का माल बरामद कर लिया है, जबकि बाकी मामलों की जांच जारी है। लेकिन इनके काम करने का तरीका और भी चौंकाने वाला है।


पहचान छिपाने के लिए बदलते थे बाइक

दोनों आरोपी बेहद चालाक निकले। हर वारदात के लिए वे अपनी बाइक का इस्तेमाल नहीं करते थे। वे दोस्तों और रिश्तेदारों से बहाने बनाकर बाइक मांगते और उसी से लूट को अंजाम देते। वारदात के बाद बाइक वापस कर देते थे ताकि शक न हो। पुलिस ने अब तक 2 बाइक जब्त की हैं, जो इन घटनाओं में इस्तेमाल हुई थीं।


एसडीओपी प्रशांत शर्मा के अनुसार, CCTV के जरिए मिली कड़ियों ने इस पूरे नेटवर्क को उजागर किया है। अब अन्य थाना क्षेत्रों की पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर बाकी लूट का माल बरामद करेगी। इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि छोटे सुराग भी बड़े अपराधियों तक पहुंचा सकते हैं—बस जरूरत है सही दिशा में जांच की।

पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें