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अब कुंडली नहीं... लड़के की फिटनेस और सिबिल स्कोर से हो रही शादी फाइनल! बढ़ रहे चौंकाने वाले केस

17 नव, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
अब कुंडली नहीं... लड़के की फिटनेस और सिबिल स्कोर से हो रही शादी फाइनल! बढ़ रहे चौंकाने वाले केस

अब कुंडली नहीं... लड़के की फिटनेस और सिबिल स्कोर से हो रही शादी फाइनल! बढ़ रहे चौंकाने वाले केस

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। भारतीय शादियों में जहां पहले राहु-केतु, ग्रह-नक्षत्र और मांगलिक दोष सबसे बड़ी रुकावट माने जाते थे, वहीं अब बदलते दौर में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। नई जनरेशन शादी तय करने से पहले ज्योतिष नहीं, बल्कि सिविल स्कोर, हेल्थ फिटनेस सर्टिफिकेट और आर्थिक स्थिरता को तरजीह दे रही है। चमक-दमक, जुलूस और भारी दहेज पीछे छूट रहा है... और आगे बढ़ रही है फिटनेस, फाइनेंस और ईमानदारी की नई मांग।


केस-1: शादी के बाद खुला राज, लड़की ने तुरंत तलाक दायर किया

फैमिली कोर्ट के एक काउंसलर ने चौंकाने वाला मामला बताया। शादी के बाद लड़की को पता चला कि उसका पति गंभीर बीमारी से पीड़ित है। मेडिकल रिपोर्ट सामने आई और लड़की ने बिना देरी किए तलाक का केस फाइल कर दिया।


केस-2: 10 साल तक चला रिश्ता, पर ‘छुपे कर्ज’ ने तोड़ी शादी

महिला थाना में दर्ज एक केस और भी हैरान करने वाला है। शादी से पहले पति ने अपने भारी कर्ज को छुपा लिया था।

 शादी के बाद पत्नी को सत्य पता चला, लेकिन उम्मीद थी कि आदत बदलेगी—रिश्ता 10 साल चला। जब सुधार नहीं हुआ, पत्नी ने तलाक ले लिया।


कर्ज-मुक्त और हेल्थ फिट दूल्हे की बढ़ी मांग

नए मामलों ने साफ कर दिया है कि युवतियां अब गंभीरता से जांच कर रही हैं—

लाइफ पार्टनर की आर्थिक स्थिति

हेल्थ रिपोर्ट

जीवनशैली और व्यवहार


महिला थाने में ऐसे 10 से ज्यादा केस दर्ज हैं, जिनमें शादी के बाद कर्ज और हेल्थ की सच्चाई सामने आने पर रिश्ता टूट गया।


“लड़कियों को पूरा हक है इनकम और व्यवहार जानने का” – थाना प्रभारी

महिला थाना प्रभारी अंजना दुबे ने स्पष्ट कहा, “लड़कियों को हक है कि वे शादी से पहले लड़के की इनकम और व्यवहार जानें। कई मामलों में शादी के बाद पता चलता है कि लड़का भारी कर्ज में डूबा है और उसका दबाव लड़की पर डाल दिया जाता है। ऐसे में रिश्ते कोर्ट पहुंचते हैं और सालों बाद टूट जाते हैं।”


आखिर क्यों बदल रहे हैं शादी के पैमाने?

➡️ हेल्थ को लेकर जागरूकता

➡️ वित्तीय पारदर्शिता की जरूरत

➡️ फेक लाइफस्टाइल और कर्ज के बढ़ते मामले

➡️ ज्योतिष पर निर्भरता कम, व्यवहार और वास्तविक स्थिति पर फोकस

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