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मीनाक्षी नटराजन नामांकन पर भाजपा की बड़ी आपत्ति, रद्द करने की मांग से बढ़ा सियासी घमासान

09 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मीनाक्षी नटराजन नामांकन पर भाजपा की बड़ी आपत्ति, रद्द करने की मांग से बढ़ा सियासी घमासान
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन विवादों में घिर गया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने नामांकन के साथ दाखिल शपथ पत्र में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी नहीं दी। अब इस विवाद पर रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला सभी की नजरों में है।


भाजपा ने नामांकन रद्द करने की उठाई मांग

भाजपा ने रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष औपचारिक आपत्ति दर्ज कराते हुए दावा किया कि नामांकन पत्र में जरूरी जानकारी छिपाई गई है। पार्टी ने मांग की है कि नियमों के उल्लंघन के आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाए। अब इस शिकायत पर प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई पूरी हो चुकी है।


भाजपा ने चुनाव आयोग की गाइडलाइन का दिया हवाला

भाजपा की ओर से अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार उम्मीदवारों को अपने शपथ पत्र में संबंधित मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है। उनके अनुसार इसी आधार पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। रिटर्निंग ऑफिसर ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसे शाम करीब 5:30 बजे सुनाया जा सकता है।


कांग्रेस ने आरोपों को बताया पूरी तरह निराधार

दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उनके मुताबिक उन्हें केवल अदालत से एक नोटिस मिला था, जिसे आपराधिक मुकदमा बताना गलत और भ्रामक है। यही दलील अब पूरे विवाद का केंद्र बनी हुई है।


विधानसभा परिसर में बढ़ी राजनीतिक हलचल

नामांकन विवाद के बीच विधानसभा परिसर में राजनीतिक माहौल गर्म रहा। रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष के बाहर कांग्रेस और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के दौरान कई बार तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बनी। दोनों दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार चलता रहा।


रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष के बाहर नारेबाजी

कांग्रेस नेताओं हेमंत कटारे और विक्रांत भूरिया के पहुंचने के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच कुछ विधायक रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष तक पहुंचने का प्रयास करने लगे। हालांकि पुलिस और विधानसभा के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया, जिससे कुछ समय के लिए माहौल और गर्म हो गया।


अब फैसले पर टिकी निगाहें

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि नामांकन वैध माना जाएगा या भाजपा की आपत्ति को स्वीकार करते हुए कोई कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले का असर राज्यसभा चुनाव की राजनीतिक तस्वीर पर भी पड़ सकता है।

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