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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस सड़क से कोर्ट तक; बीजेपी ने दिग्विजय सिंह की चुप्पी पर उठाए सवाल

10 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस सड़क से कोर्ट तक; बीजेपी ने दिग्विजय सिंह की चुप्पी पर उठाए सवाल
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद सियासी विवाद और गहरा गया है। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला बताते हुए सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। वहीं बीजेपी इस पूरे मामले में कांग्रेस को ही कटघरे में खड़ा कर रही है।


भोपाल से दिल्ली तक कांग्रेस का प्रदर्शन

नामांकन निरस्त होने के बाद राजधानी भोपाल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने निर्वाचन कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। कई नेता सड़क पर लेटकर सरकार और चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते दिखाई दिए। इसी मुद्दे पर दिल्ली में भी कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग के बाहर धरना दिया। विधानसभा परिसर के बाहर भी कांग्रेस विधायकों और नेताओं ने जोरदार हंगामा किया।


मीनाक्षी नटराजन बोलीं- "वोट चोरी के बाद सीट भी चुराई"

नामांकन रद्द होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि "वोट चोरी के बाद अब सीट भी चुराई गई है।" उनका कहना है कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगी और कानूनी लड़ाई लड़ेंगी। कांग्रेस का दावा है कि नामांकन निरस्त करने का आधार सही नहीं है और मामले को न्यायालय में रखा जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी, सिंघवी करेंगे पैरवी

कांग्रेस ने इस मामले को लेकर कानूनी मोर्चा भी खोल दिया है। पार्टी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रही है। जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी कांग्रेस की ओर से अदालत में पक्ष रखेंगे। कांग्रेस का कहना है कि वह इस विवाद को कानूनी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर लड़ेगी।


पूर्व प्रमुख सचिव ने बताया कानूनी विकल्प

मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवान देव इसरानी के अनुसार, ऐसे मामलों में अदालत सबसे प्रभावी विकल्प है। उन्होंने कहा कि यदि मामला निर्वाचन आयोग के समक्ष रखा जाता है तो आयोग भी इसकी सुनवाई कर सकता है। उनके बयान के बाद इस विवाद के कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा तेज हो गई है।


केसी वेणुगोपाल ने भाजपा पर लगाए आरोप

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उनके मुताबिक शपथ पत्र में जानकारी छिपाने का आरोप पूरी तरह निराधार है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस फैसले को स्वीकार नहीं करेगी और हर संवैधानिक मंच पर इसका विरोध जारी रहेगा।


बीजेपी का पलटवार, दिग्विजय सिंह की चुप्पी पर सवाल

बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि नामांकन से जुड़े दस्तावेज उन्हें कांग्रेस के ही एक नेता ने उपलब्ध कराए थे।


वहीं बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो साझा करते हुए दिग्विजय सिंह की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रेस वार्ता में बार-बार आग्रह के बावजूद दिग्विजय सिंह ने कुछ नहीं कहा और उनकी खामोशी ही सबसे बड़ा बयान बन गई।


अब आगे क्या?

फिलहाल इस पूरे विवाद की अगली दिशा अदालत तय करेगी। कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है, जबकि बीजेपी इसे कांग्रेस की आंतरिक विसंगतियों से जोड़कर राजनीतिक हमला तेज कर रही है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

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