
भोपाल। मेट्रो टिकटिंग सिस्टम आज से पूरी तरह बदल गया है। अब यात्रियों को लंबी लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी—सिर्फ QR कोड स्कैन करके टिकट मिल जाएगा। यह बदलाव सीधे तौर पर सफर को आसान और तेज बनाने वाला है।
QR कोड से टिकट, लाइन का झंझट खत्म
सोमवार से मेट्रो स्टेशनों पर ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लागू कर दिया गया है। अब यात्री मेट्रो कॉरपोरेशन के मोबाइल ऐप के जरिए QR कोड स्कैन कर टिकट बुक कर सकते हैं। इस नई व्यवस्था से टिकट काउंटर पर भीड़ कम होने की उम्मीद है। फिलहाल यात्रियों की संख्या कम है, लेकिन जैसे-जैसे सुविधा बढ़ेगी, यात्री संख्या में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
अभी सिर्फ 7 किमी में चल रही मेट्रो
फिलहाल मेट्रो सेवा एम्स से सुभाष नगर के बीच करीब 7 किलोमीटर तक सीमित है। ट्रेन की टाइमिंग भी सीमित है—यह रोजाना करीब 5 घंटे चलती है, जो सुबह 11 बजे से शुरू होकर शाम 4:15 बजे तक जारी रहती है। आने वाले समय में इसे बढ़ाने की योजना है, जिससे आम लोगों की निर्भरता और बढ़ेगी।
डिजिटल पेमेंट पर खास छूट
यात्रियों को डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मेट्रो प्रशासन ने विशेष छूट की घोषणा की है। मेट्रो ऐप वॉलेट में पैसे जोड़ने पर 8% से 15% तक की छूट मिलेगी। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि वॉलेट में जमा राशि सिर्फ टिकट खरीद के लिए ही उपयोग होगी और इसे वापस नहीं लिया जा सकेगा।
राउंड ट्रिप और ग्रुप टिकट में फायदा
अगर यात्री एक ही दिन में आने-जाने की टिकट लेते हैं, तो उन्हें कुल किराए में 5% की छूट मिलेगी। वहीं समूह में यात्रा करने वालों के लिए भी बड़ा फायदा है। 8 से 40 लोगों के ग्रुप टिकट पर 10% तक की छूट दी जाएगी। इससे परिवार और समूह यात्राएं सस्ती पड़ेंगी।
2030 तक पूरा होगा बड़ा मेट्रो नेटवर्क
मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत ऑरेंज और ब्लू लाइन पर तेजी से काम चल रहा है। भदभदा से रत्नागिरी लाइन में जल्द ही करीब 1.5 किलोमीटर का स्लैब डाला जाएगा। वहीं लक्ष्य है कि 2027 तक ब्लू लाइन का 80% काम पूरा कर लिया जाए। नई समय सीमा के अनुसार 2030 तक ऑरेंज और ब्लू लाइन पूरी तरह तैयार हो जाएंगी, हालांकि मेट्रो कॉरपोरेशन इसे 2027-28 तक पूरा करने की कोशिश में है।
आने वाले समय में बढ़ेगी मेट्रो की अहमियत
मेट्रो को भविष्य में शहर की लाइफलाइन के रूप में देखा जा रहा है। नई टिकटिंग तकनीक और बढ़ते नेटवर्क के साथ यह साफ है कि आने वाले वर्षों में मेट्रो आम लोगों के रोजमर्रा के सफर का अहम हिस्सा बन जाएगी—और यही बदलाव अभी से दिखने लगा है।
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