
भोपाल। मध्यप्रदेश में कुछ दिनों की झमाझम बारिश के बाद अब मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। प्रदेश में सक्रिय मानसूनी सिस्टम कमजोर होने के कारण फिलहाल अधिकांश जिलों में केवल हल्की से मध्यम बारिश ही दर्ज की जा रही है। अगस्त का महीना शुरू हो चुका है, लेकिन बारिश के आंकड़े अब भी सामान्य से पीछे चल रहे हैं। प्रदेश में अब तक औसत से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी मध्यप्रदेश में 19 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। रविवार को सीहोर को छोड़कर किसी भी जिले में तेज बारिश दर्ज नहीं की गई। वहीं आज भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की ही संभावना जताई गई है
भोपाल में 10 सालों में दूसरी बार जुलाई का महीने में कम बारिश
अगर राजधानी भोपाल की बात करें तो यहां भी बारिश का प्रदर्शन उम्मीद से काफी कमजोर रहा है। जुलाई महीने में भोपाल में औसतन 14.48 इंच बारिश होती है, लेकिन इस वर्ष केवल 10.31 इंच वर्षा दर्ज की गई, यानी सामान्य से 4.16 इंच कम। पिछले 10 वर्षों में यह दूसरी बार है जब जुलाई में इतनी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। प्रदेश के केवल 13 जिलों—इंदौर, देवास, सीहोर, राजगढ़, बुरहानपुर, मऊगंज, उमरिया, शहडोल, टीकमगढ़, खंडवा, खरगोन, बड़वानी और भिंड—में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। जबकि राजधानी भोपाल समेत 42 जिलों में औसत से कम वर्षा दर्ज की गई है। अब सभी की निगाहें अगस्त पर टिकी हैं, क्योंकि मानसून का यही चरण प्रदेश के बारिश के आंकड़ों को संतुलित करने में सबसे अहम माना जाता है। यदि इस महीने भी अच्छी बारिश नहीं हुई, तो इसका असर खेती, जलाशयों और भूजल स्तर पर साफ दिखाई दे सकता है।
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