
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नए साल की शुरुआत प्रदूषण के मोर्चे पर राहत की खबर लेकर आई है। इंसानों की वजह से बिगड़ती हवा को संभालने में जहां सिस्टम नाकाम नजर आता है, वहीं इस बार प्रकृति ने ही हालात संभाल लिए। साल के शुरुआती पांच दिनों में शहर के औसत AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) में तेज सुधार दर्ज किया गया है, जिसका मुख्य कारण ठंड, नमी और कोहरा बताया जा रहा है।
चार दिनों में 100 अंकों का सुधार
01 और 02 जनवरी 2026 को भोपाल का AQI 240–241 के आसपास दर्ज किया गया था, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। लेकिन 05 जनवरी तक यह घटकर 136 पर पहुंच गया। यानी महज चार दिनों में हवा की सेहत में करीब 100 अंकों का सुधार देखने को मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगले 2–3 दिन मौसम का यही मिजाज बना रहा तो AQI 100 के नीचे आ सकता है, जिसे ‘स्वस्थ’ स्तर माना जाता है।
100% के करीब पहुंची वातावरण में नमी
शहर में वातावरण की नमी 97 प्रतिशत यानी लगभग 100% तक पहुंच गई। इसकी वजह से हवा में धूल के कण टिक नहीं पा रहे हैं। 05 जनवरी को अलग-अलग इलाकों के आंकड़े भी राहत की तस्वीर दिखाते हैं—
पर्यावरण परिसर: 111 AQI
कलेक्टोरेट ऑफिस: 110 AQI
टीटी नगर: 118 AQI
ये सभी इलाके ‘मध्यम’ श्रेणी में दर्ज किए गए।
नमी बढ़ी तो बने ड्रॉपलेट्स, गिरी धूल
सर्दियों में बढ़ी नमी के कारण हवा में सूक्ष्म ड्रॉपलेट्स बनती हैं। ये बूंदें हवा में तैरते पीएम-10 और पीएम-2.5 जैसे कणों से चिपक जाती हैं, जिससे उनका वजन बढ़ जाता है और वे नीचे जमीन पर बैठ जाते हैं। सुबह दिखने वाली ओस की परत और हल्का कोहरा इसी प्रक्रिया का साफ संकेत है।
ठंड, ओस और हवा की धीमी रफ्तार बने नेचुरल क्लीनर
भोपाल के पल्मोनरी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. विकास मिश्रा बताते हैं कि सर्दियों में कुछ दिनों तक नमी बढ़ने से AQI में अस्थायी सुधार होता है, लेकिन इसे स्थायी राहत मानना गलत होगा। मौसम वैज्ञानिक भी मानते हैं कि ठंडी रातें, हवा की धीमी रफ्तार और ओस मिलकर नेचुरल क्लीनिंग सिस्टम की तरह काम करते हैं, लेकिन दिन चढ़ते ही ट्रैफिक और निर्माण गतिविधियां तेज होते ही प्रदूषण फिर बढ़ सकता है।
ज्यादा दिन काम नहीं आएगी ओस की ये ढाल
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह सुधार पूरी तरह मौसम पर आधारित है, न कि सिस्टम पर। अगर निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, खुले में कचरा जलाने पर सख्ती और डीजल वाहनों की निगरानी नहीं की गई, तो ओस और कोहरे की यह ढाल ज्यादा दिन शहर को प्रदूषण से नहीं बचा पाएगी।
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