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MP Water Mission Success: अमृत सरोवरों से बदली तस्वीर, जल संरक्षण में मध्यप्रदेश बना देश में नंबर-1

25 मार्च, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP Water Mission Success: अमृत सरोवरों से बदली तस्वीर, जल संरक्षण में मध्यप्रदेश बना देश में नंबर-1
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश में पानी बचाने की मुहिम अब सिर्फ योजना नहीं, बल्कि एक सफल मॉडल बन चुकी है। जल गंगा संवर्धन अभियान के जरिए राज्य ने जल संरक्षण में ऐसा प्रदर्शन किया है कि अब देशभर में इसकी चर्चा हो रही है।


देश में अव्वल बना मध्यप्रदेश

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमृत सरोवर योजना के तहत मध्यप्रदेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश में पहला स्थान हासिल किया है। आईआईटी दिल्ली और ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में जल क्षेत्र में 128% से ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत (लगभग 11%) से कई गुना अधिक है।


हजारों अमृत सरोवरों ने बदली तस्वीर

प्रदेश में जल संरक्षण को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर अमृत सरोवर बनाए गए हैं।


आंकड़ों में समझें:

कुल लक्ष्य: 6393 अमृत सरोवर

पहले चरण में बने: 5839 सरोवर

दूसरे चरण में निर्माणाधीन: 554 सरोवर


इन जल स्रोतों ने न सिर्फ पानी की उपलब्धता बढ़ाई, बल्कि ग्रामीण इलाकों में जीवन स्तर पर भी असर डाला है।


AI और सैटेलाइट से हुआ हाईटेक सर्वे

इस योजना की खास बात यह रही कि इसका मूल्यांकन आधुनिक तकनीकों से किया गया।


इस्तेमाल हुई तकनीक:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

सैटेलाइट इमेजिंग

SONAR और LiDAR


इन तकनीकों की मदद से न सिर्फ तालाबों का क्षेत्र, बल्कि पानी की मात्रा का भी सटीक आकलन किया गया।


किसानों को मिला बड़ा फायदा

जल संरक्षण का सीधा लाभ किसानों को मिला है।


- सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ी

- फसलों की उत्पादकता में सुधार

- भूजल स्तर में बढ़ोतरी


कुओं और ट्यूबवेल में पानी की स्थिति बेहतर

सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी गर्मियों के दौरान पानी उपलब्ध होना इस योजना की बड़ी सफलता मानी जा रही है।


वैज्ञानिक तरीके से चुनी गई जगहें

अमृत सरोवरों के निर्माण के लिए स्थानों का चयन भी आधुनिक तकनीक से किया गया।


इसके लिए सिपरी सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया, जिसमें:

भूविज्ञान

जमीन की ढलान (कंटूर)

जल निकासी प्रणाली

मिट्टी का प्रकार

भूमि उपयोग


जैसे कई डेटा को मिलाकर विश्लेषण किया गया। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि जहां सरोवर बनाए जाएं, वहां जल संचयन सबसे प्रभावी हो।

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