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एमपी विधानसभा में केन-बेतवा परियोजना पर घमासान, एक महीने में जांच का भरोसा, आदिवासी जमीन हस्तांतरण पर भी होगी कार्रवाई

22 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
एमपी विधानसभा में केन-बेतवा परियोजना पर घमासान, एक महीने में जांच का भरोसा, आदिवासी जमीन हस्तांतरण पर भी होगी कार्रवाई
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन केन-बेतवा परियोजना और आदिवासी जमीन हस्तांतरण के मुद्दों पर सदन में विस्तृत चर्चा हुई। विपक्ष ने पुनर्वास, मुआवजा और परियोजना में संभावित गड़बड़ियों को लेकर सरकार से जवाब मांगा।


सरकार ने प्रभावित परिवारों के मामलों की जांच कराने का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यदि किसी को मुआवजा नहीं मिला है या परियोजना में कोई अनियमितता हुई है तो एक महीने के भीतर जांच कर समाधान किया जाएगा।


केन-बेतवा परियोजना पर विपक्ष के सवाल

प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई लोगों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है और परियोजना में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की आशंका भी जताई।


उन्होंने मांग की कि परियोजना से प्रभावित सभी गांवों की सर्वे रिपोर्ट सदन के सामने रखी जाए, ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।


सरकार ने दिए विस्थापन के आंकड़े

राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रभावित परिवारों के लिए कार्रवाई की जा रही है।


उन्होंने सदन को बताया कि: 

  • पन्ना जिले के 7 गांवों के 1321 परिवार विस्थापित हुए हैं।

  • 8 गांवों के 1699 किसानों की जमीन भूमि अधिग्रहण से प्रभावित हुई है।

  • छतरपुर जिले के 14 गांवों के 3718 परिवार भूमि अधिग्रहण और विस्थापन से प्रभावित हुए हैं।


मुआवजा नहीं मिलने की शिकायत पर क्या कहा?

राजस्व मंत्री ने कहा कि यदि कोई किसान या ग्रामीण यह दावा करता है कि उसे मुआवजा नहीं मिला है, तो उसके मामले की जांच कर पात्रता के अनुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही उन्होंने विपक्ष की मांग पर प्रभावित गांवों की सर्वे रिपोर्ट सदन में रखने की बात भी कही।


मुख्यमंत्री ने दिया एक महीने का समय

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि परियोजना से जुड़े किसी भी मामले में यदि अनियमितता सामने आती है या कोई प्रभावित व्यक्ति मुआवजे से वंचित रह गया है तो सरकार उसकी जांच कराएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एक महीने के भीतर जांच पूरी कर प्रभावित लोगों की समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।


आदिवासी जमीन हस्तांतरण का मुद्दा भी उठा

कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने सदन में आदिवासियों की जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने 1980 के बाद छल-कपट के जरिए गैर-जनजातियों के नाम हुई जमीनों की जांच और पुनर्बहाली की मांग की। इस पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 170(ख) के तहत कार्रवाई का प्रावधान मौजूद है। जहां भी अवैध हस्तांतरण पाया जाएगा, वहां जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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